बेंगलुरु , सितंबर 25 -- कर्नाटक के बेंगलुरु की एक अदालत ने लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के कथित कैश-फॉर-जॉब (नौकरी के बदले रिश्वत) घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार निलंबित आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। अभियुक्त के वकील ने उनके कैंसर के इलाज और अन्य गंभीर बीमारियों का हवाला देते हुए अदालत से जमानत देने की मांग की थी।
मामले में आरोपी नंबर 5 और केपीएससी के पूर्व परीक्षा नियंत्रक श्री गंगवार ने अपने वकील के माध्यम से दावा किया था कि वह वृषण कैंसर से पीड़ित रहे हैं, उनकी दो बार सर्जरी हो चुकी है और अभी भी कीमोथेरेपी चल रही है। उनके वकील ने उच्च रक्तचाप, अस्थमा, क्रॉनिक लिवर की समस्याओं और 3 सितंबर को विक्टोरिया अस्पताल में कराई गई एमआरआई में रीढ़ की हड्डी में गंभीर क्षरण का भी हवाला दिया, जिसके लिए डॉक्टरों ने कथित तौर पर सर्जरी और पूर्ण बेड रेस्ट की सलाह दी थी।
अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि श्री गंगवार एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और यदि उन्हें रिहा किया गया तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं तथा जारी जांच में बाधा डाल सकते हैं। सरकारी वकील भाग्यलक्ष्मी के.एल. ने अदालत को बताया कि सीआईडी ने उस स्थान की पहचान कर ली है जहां श्री गंगवार ने कथित तौर पर सह-आरोपी बसवराज कन्नाले को प्रश्नपत्र सौंपे थे। इसके अलावा, जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि अपराध में इस्तेमाल किए गए एक शाओमी टैबलेट को नष्ट कर दिया गया था।
अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि कन्नाले ने ओम लक्ष्मी सौहार्द को-ऑपरेटिव सोसाइटी और एक अन्य व्यक्ति से जुड़े खातों के माध्यम से उम्मीदवारों से पैसे एकत्र किए थे तथा उन पैसों के एक हिस्से का इस्तेमाल गंगवार के लिए सोना खरीदने में किया था। सीआईडी जांचकर्ताओं ने जांच के तहत सोने के गहने भी जब्त किए हैं।
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