भोपाल , अप्रैल 23 -- मध्यप्रदेश में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के खिलाफ छतरपुर और पन्ना जिलों में चल रहे जन आंदोलन को जन संघर्ष समन्वय समिति, रचनात्मक कांग्रेस और बिरसा मिसाइल फोर्स ने समर्थन देने की घोषणा की है। संगठनों का कहना है कि यह परियोजना आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन के साथ हजारों परिवारों के जीवन पर संकट पैदा कर रही है।
प्रतिनिधि मंडल ने 20 से 22 अप्रैल के बीच प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर डूब क्षेत्र के गांवों का जायजा लिया और विस्थापित होने वाले परिवारों से बातचीत की। इस दौरान स्थानीय आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर स्थिति की जानकारी ली गई।
डूब प्रभावित ग्राम कूपी में आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि परियोजना का प्रभाव कागजी आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर है और यह केवल जमीन का नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के अस्तित्व का प्रश्न है। संगठनों ने कहा कि वे मानवीय गरिमा और पर्यावरणीय न्याय के लिए चल रहे हर संघर्ष के साथ खड़े रहेंगे।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त सहमति और पुनर्वास के लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को सुनिश्चित किया जाए और "जमीन के बदले जमीन" का प्रावधान लागू किया जाए।
प्रभावित परिवारों ने मुआवजा बढ़ाकर 25 लाख रुपये प्रति परिवार करने, नकद के बजाय जमीन देने, सर्वेक्षण में हुई गड़बड़ियों को सुधारने और प्रत्येक वयस्क सदस्य को अलग इकाई मानकर मुआवजा देने की मांग रखी है।
ग्रामीणों द्वारा चिता आंदोलन, जल सत्याग्रह, मिट्टी आंदोलन और उपवास जैसे माध्यमों से विरोध दर्ज कराया जा रहा है। संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे इन मांगों को हर स्तर पर उठाएंगे और प्रभावित समुदायों के साथ एकजुटता बनाए रखेंगे।
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