नयी दिल्ली , अप्रैल 01 -- राज्यसभा ने विपक्षी सदस्यों के वाकआउट के बीच केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (समान्य प्रशासन) विधेयक 2026 को बुधवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

विपक्ष के सदस्यों ने विधेयक में संशोधन के प्रस्ताव दिये थे लेकिन सदस्यों के सदन में मौजूद नहीं रहने के कारण इन्हें पेश नहीं किया गया। विपक्षी सदस्य विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग कर रहे थे जिसे नहीं माने जाने पर उन्होंने सदन से वाक आउट किया।

केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पर करीब आठ घंटे चली चर्चा का जवाब देते हुए कहा कियह विधेयक देश की सुरक्षा व्यवस्था को और सुरक्षित तथा सुदृढ बनाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह अधिकारियों की सेवा शर्तों में उत्पन्न प्रशासनिक और कैडर प्रबंधन से जुड़ी हुई चुनौतियों के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है।

इससे पहले विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने श्री राय के जवाब को आधा अधूरा बताते हुए कहा कि इसमें विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाये गये मुद्दाें का जवाब नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को विस्तृत चर्चा के लिए प्रवर समिति में भेजा जाना चाहिए। उनकी मांग नहीं माने जाने पर विपक्षी सदस्य सदन से बहिगर्मन कर गये।इसके बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा नड्डा ने विपक्ष के इस आचारण की निंदा करते हुए कहा कि श्री खरगे काफी अनुभवी सदस्य हैं और बहस में हिस्सा लेने और स्पष्टीकरण में अंतर का पता है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने पद का दुरूपयोग किया और मंत्री के जवाब के बाद वक्तव्य देने लेगे। उन्होंने कहा कि यह संसदीय परंपराओं के विरूद्ध है। भाजपा नेता ने कहा कि विपक्ष को बहस में रूचि नहीं है और न ही लोकतंत्र की प्रकियाओं का वह सम्मान करता है।

श्री राय ने कहा कि यह विधेयक केवल एक विधायी प्रस्ताव के रूप में नहीं बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को और सुरक्षित तथा सुदृढ बनाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि विधेयक के प्रावधानों के लागू जाने से इन बलों की कार्यकुशलता और मनोबल दोनों बढेंगे। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों का पिछले समय में दायरा निरंतर बढता गया है जिससे इनके अलग अलग नियम और प्रशासनिक ढांचे विकसित हुए और बहुत सी चीजों में अस्पष्टता देखने को मिली । इससे पुलिस बलों के संचालन में कई असुविधाएं भी दिखाई पड़ी।

मंत्री ने कहा कि यह विधेयक इन सभी बलों के संचालन को एक सुव्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि अलग नियमों के कारण कुछ प्रशासनिक विपषमताएं आ गयी थी । केन्द्रीय पुलिस बलों में समन्वित और बेहतर निर्णय तथा कार्यकुशलता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिनियुक्ति के आधार पर शीर्ष अधिकारियों की तैनाती की व्यवस्था विकसित हुई है जिनमें भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी भी शामिल हैं।

विधेयक में बल के अधिकारियों की सेवा शर्तों , पदोन्नति और कार्य प्रणाली को एकसमान रूप देने के प्रावधान किये गये हैं।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से ग्रुप ए के अधिकारियों की भर्ती और उनकी पदोन्नति के लिए भी इसमें व्यवस्था की गयी है और नियमों को स्पष्ट किया गया है तथा विसंगतियों को दूर किया गया है। उन्होंने कहा कि विधेयक के माध्यम से अधिकारियों के वित्तीय लाभों में कोई अंतर नहीं किया गया है और उनके वित्तीय लाभ बरकरार रखे गये हैं। विधेयक के माध्यम से कैडर प्रबंधन को भी सुव्यवस्थित रूप दिया गया है।

उन्होंने विपक्ष की इन आशंकाओं को खारिज कर दिया कि यह संघीय ढांचे के विरूद्ध है और कहा कि इसके विपरीत से संघीय व्यवस्था और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों तथा पुलिस बलों में कार्य का अनुभव रखने वाले अधिकारियों की इन बलों में तैनाती से यह अवधारणा और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष की यह आशंका भी निराधार है कि इससे पदोन्नति के अवसर प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि अभी भी अधिकारियों को चार पदोन्नति मिलती है और कुछ को पांचवीं पदोन्नति का भी अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में मामलों के लंबित होने से ही पदोन्नति में विलंब होता है।

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