केदारनाथ , अप्रैल 30 -- उत्तराखंड में भगवान केदारनाथ धाम में इस वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान स्वच्छता को लेकर नगर पंचायत ने सराहनीय पहल की है। कपाट खुलने के शुरुआती सात दिनों में ही लगभग एक हजार किलो प्लास्टिक कचरा एकत्रित कर उसे कॉम्पेक्ट किया गया है। इसके साथ ही गीले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए पक्के पिट्स बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिससे धाम में कचरा प्रबंधन को स्थायी समाधान मिल सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड अपनी आस्था के साथ-साथ नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने तीर्थयात्रियों से अपील की कि हिमालयी क्षेत्रों में प्लास्टिक और अन्य कचरा इधर-उधर न फेंकें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पवित्र नदियों और हिमालय की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा नगर निकायों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से यात्रा मार्गों पर सघन सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से धाम में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे पानी की बोतलों सहित प्लास्टिक कचरे की मात्रा में तेजी आई है। इस चुनौती से निपटने के लिए नगर पंचायत ने लगभग 3000 वर्ग फीट क्षेत्र में मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) स्थापित की है, जहां कचरे को 15 अलग-अलग श्रेणियों-जैसे प्लास्टिक, कांच, टिन और कपड़े-में विभाजित किया जा रहा है। कॉम्पेक्टर मशीन के जरिए प्लास्टिक बोतलों को पिचकाकर 30 से 40 किलो की गठरी में बदला जा रहा है, जिससे उनके परिवहन और पुनर्चक्रण में आसानी हो रही है।
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