हैदराबाद , जनवरी 19 -- भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री के. टी. रामाराव(केटीआर) ने सिरसिला के लिए मेगा पावरलूम क्लस्टर को मंजूरी देने में हो रही देरी को लेकर सोमवार को भाजपा-नियंत्रित केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह देरी तेलंगाना के बुनकर समुदाय के खिलाफ "राजनीतिक प्रतिशोध" का परिणाम है।

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह को लिखे एक पत्र में श्री रामाराव ने कहा कि व्यापक पावरलूम क्लस्टर विकास योजना (सीपीसीडीएस) के तहत सभी पात्रता मानकों को पूरा करने के बावजूद सिरसिला का प्रस्ताव पिछले एक दशक से लंबित है।

उन्होंने बताया कि बीते 12 वर्षों में वे इस मुद्दे पर कई बार केंद्र सरकार को पत्र लिख चुके हैं और दिवंगत श्री अरुण जेटली, सुश्री स्मृति ईरानी तथा वर्तमान वस्त्र मंत्री सहित विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात भी कर चुके हैं।

श्री रामाराव ने सवाल उठाया, "करीब दस बार केंद्रीय मंत्रियों से मिलने और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के बावजूद केंद्र ने अब तक कोई सकारात्मक फैसला क्यों नहीं लिया? आखिर सिरसिला की फाइल को एक तरफ रखने का असली कारण क्या है?" उन्होंने आरोप लगाया कि इस देरी के पीछे केवल राजनीतिक पक्षपात ही कारण है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय टीमों ने भी क्षेत्र का निरीक्षण किया था और सीपीसीडीएस के तहत इसकी पात्रता की पुष्टि की थी। श्री रामाराव ने बताया कि तेलंगाना की वस्त्र अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सिरसिला में 30 हजार से अधिक पावरलूम हैं और हजारों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में कम क्षमता और कम श्रमिकों वाले क्षेत्रों को मेगा क्लस्टर की मंजूरी दी गई, जबकि सिद्ध क्षमता और मजबूत आधार के बावजूद सिरसिला को नजरअंदाज किया गया।

श्री रामाराव ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में तेलंगाना सरकार ने इस क्लस्टर के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली थीं। भूमि आवंटन, निर्बाध बिजली और पानी की आपूर्ति, सिंगल-विंडो मंजूरी और राज्य स्तरीय प्रोत्साहन पहले से उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा, "किसी तकनीकी या वित्तीय कारण के बिना प्रस्ताव को लंबित रखना महज प्रशासनिक अहंकार है।"केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए श्री रामाराव ने कहा कि भाजपा 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' की बात करती है, लेकिन देश के सबसे सक्षम वस्त्र केंद्रों में से एक को समर्थन देने में विफल रही है।

उन्होंने चेतावनी दी कि इस देरी की मानवीय और आर्थिक कीमत बुनकर चुका रहे हैं और दावा किया कि क्षेत्र में एक बार फिर संकट आ गया है, जहां बुनकरों की आत्महत्याओं की खबरें सामने आने लगी हैं।

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