बेंगलुरु , मार्च 22 -- फिल्म इंडस्ट्री में गहराती 'प्रोपेगेंडा बनाम सच' की बहस में शामिल होते हुए ग्रैमी पुरस्कार विजेता रिकी केज ने आदित्य धर की 'धुरंधर' फ्रेंचाइजी को ऐसी 'क्रांति' करार दिया है जो कोरा सत्य पेश करती है और 'राष्ट्रीय पहचान की नयी भावना' को दर्शाती है।

फिल्म के विषय को लेकर हो रही आलोचनाओं पर राय रखते हुए केज ने कहा कि बॉलीवुड ने दशकों से 'खास तरह के नैरेटिव पैटर्न को सामान्य बना दिया है'। उन्होंने कहा कि इसमें 'विरोधियों का सहानुभूतिपूर्ण चित्रण, रूढ़िवादी चरित्र और भारतीय परंपराओं को प्रतिगामी दिखाना' शामिल है, जिन्होंने समय के साथ दर्शकों की सोच को प्रभावित किया है।

उन्होंने कहा कि इसके उलट 'धुरंधर' फिल्में अपनी 'जड़ों से जुड़ी और मुखर कहानियों' के जरिये 'इन पुरानी परंपराओं को तोड़ने' की कोशिश करती हैं। उन्होंने इस फ्रेंचाइजी को भारतीय सिनेमा में आ रहे एक उभरते बदलाव के हिस्से के रूप में पेश किया।

केज की इन टिप्पणियों ने फिल्म जगत के भीतर बहस छेड़ दी है, जिस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहां कुछ लोगों ने अधिक प्रामाणिक और सांस्कृतिक रूप से जुड़ी कहानियों की मांग का समर्थन किया है, वहीं अन्य ने पुराने फिल्मी रुझानों को सीधे तौर पर प्रोपेगेंडा बताने के खिलाफ आगाह किया है।

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