नयी दिल्ली , जुलाई 15 -- राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता एवं कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के हॉस्टलों की मेस में नॉनवेज भोजन पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को असंवैधानिक एवं अनुचित बताया और कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का भोजन करने, पहनने और उपासना करने का अधिकार देता है तथा ऐसे में किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का खान-पान पर प्रतिबंध लगाने जैसा निर्देश उचित नहीं है।
श्री तिवारी ने कहा कि केजीएमयू देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में से एक है, जहां देशभर से छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं। संस्थान की स्थापना से लेकर अब तक कभी भी छात्रों के भोजन पर इस तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया गया। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन को सुधार करना है तो रिक्त अध्यापक पदों को भरे, दवा घोटालों की पुनरावृत्ति रोके और छात्रों के लिए बेहतर चिकित्सा एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराये।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह स्वयं शाकाहारी हैं, लेकिन किसी व्यक्ति को क्या खाना है और क्या पहनना है, इसका निर्णय उसी व्यक्ति पर छोड़ देना चाहिए। किसी शिक्षण संस्थान में भोजन की पसंद पर रोक लगाना संविधान की भावना के विपरीत है और पद के दुरुपयोग जैसा है।
गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने केजीएमयू के निरीक्षण के दौरान स्वच्छता संबंधी कमियों और कुछ हॉस्टलों में मांसाहारी भोजन तैयार किए जाने पर चिंता जतायी थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी 18 हॉस्टल मेस में नॉनवेज भोजन पकाने और परोसने पर प्रतिबंध लागू कर दिया है। इस फैसले को लेकर अब राजनीतिक बहस भी तेज हो गयी है।
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