भुवनेश्वर , मई 02 -- ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आग्रह किया कि वह केओंझर की चौंकाने वाली घटना में तत्काल जवाबदेही सुनिश्चित करें।

इस घटना में एक आदिवासी व्यक्ति को अपनी बहन के कंकाल को कब्र से निकालकर उसकी मौत के सबूत के तौर पर बैंक ले जाना पड़ा ताकि वह बहन की बकाया राशि पर दावा कर सके।

केंद्रीय वित्त मंत्री को लिखे एक पत्र में श्री पटनायक ने केओंझर जिले में ओडिशा ग्राम्य बैंक की मल्लिपोसी शाखा में 27 अप्रैल को हुई घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जीतू मुंडा बैंक के बार-बार चक्कर लगाने और अधिकारियों से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के कारण अपनी मृत बहन की मौत को साबित करने के लिए उसके कंकाल को बैंक लाने पर मजबूर हो गया।

श्री पटनायक ने इस घटना को बेहद परेशान करने वाला बताया और बैंक द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का पालन करने का हवाला देकर इस घटना को सही ठहराने की कथित कोशिश की निंदा की।

बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह की प्रतिक्रिया अधिकारियों के बीच एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाती है, जिसमें वे उन नागरिकों की सेवा करने के बजाय प्रक्रियाओं की आड़ में छिप जाते हैं, जिनकी सेवा करना उनका कर्तव्य है।उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में नियम नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए होते हैं, न कि उन्हें अपमानित करने के लिए।" उन्होंने कहा कि इस भयानक घटना से पूरे ओडिशा में भारी आक्रोश फैल गया है और इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें बीबीसी और न्यूयॉर्क पोस्ट जैसे मीडिया संस्थानों में छपी रिपोर्टें भी शामिल हैं।

श्री पटनायक ने कहा कि इसने एक अधिक मानवीय और नागरिक-केंद्रित बैंकिंग प्रशासन की तत्काल आवश्यकता को उजागर किया है, विशेष रूप से दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में। उन्होंने श्रीमती सीतारमण से आग्रह किया कि वे इस चूक के लिए तुरंत जवाबदेही तय करें। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम पूरे देश में ग्रामीण बैंकिंग संस्थानों को एक कड़ा संदेश देगा कि वे दयालु, सहानुभूतिपूर्ण और जन-अनुकूल सेवा प्रदान करना सुनिश्चित करें।

श्री पटनायक ने केंद्रीय वित्त मंत्री से यह सुनिश्चित करने के लिए भी हस्तक्षेप की मांग की कि भारत में कहीं भी किसी भी नागरिक को दोबारा इस तरह के अमानवीय व्यवहार का सामना न करना पड़े।

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