बेंगलुरु , अगस्त 07 -- कर्नाटक मंत्रिमंडल में बी नागेंद्र की दोबारा वापसी से बहुचर्चित वाल्मीकि निगम कोष घोटाले को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक राष्ट्र समिति (केआरएस) ने उन्हें तुरंत मंत्री पद से हटाने की मांग की है और ऐसा न होने पर पूरे राज्य में जोरदार आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
केआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष रघु जनगेरे ने शुक्रवार को कांग्रेस सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाया कि जब अदालत में मामला चल रहा है और कई जांच एजेंसियां अपनी जांच कर चुकी हैं, तब श्री नागेंद्र को फिर से मंत्री पद क्यों सौंपा गया है।
श्री जनगेरे ने सवाल किया, " गंभीर आरोपों का सामना कर रहे श्री नागेंद्र को दोबारा मंत्री क्यों बनाया जा रहा है?" उन्होंने कांग्रेस सरकार पर जवाबदेही और भ्रष्टाचार के मामले में एक खतरनाक संदेश देने का आरोप लगाया।
केआरएस ने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और विशेष जांच दल (एसआईटी) ने वाल्मीकि निगम मामले की जांच करके अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिये हैं। श्री जनगेरे ने कहा कि इस मामले से जुड़ी कार्यवाहियों और आरोपों के कारण न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक श्री नागेंद्र का मंत्रिमंडल में लौटना पूरी तरह अस्वीकार्य है।
यह पूरा विवाद कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के धन के दुरुपयोग और हेरफेर से जुड़ा है। श्री जनगेरे ने कांग्रेस सरकार पर अपनी ईमानदारी के दावों से समझौता करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार को जनता को जवाब देना चाहिए कि जनता के पैसों से जुड़े गंभीर मामलों का सामना कर रहे व्यक्ति को दोबारा मंत्री पद क्यों दिया गया है।
केआरएस ने मांग की है कि जब तक जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक श्री नागेंद्र को मंत्रिमंडल से बाहर रखा जाना चाहिए।
पार्टी ने कहा कि अगर हालात ऐसे ही हैं, तो नागेंद्र को अपने राजनीतिक पद पर उठ रहे सवालों से बचने के लिए विधायक पद से इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए।
श्री जनगेरे ने इस बात पर भी जोर दिया कि श्री नागेंद्र फिलहाल जमानत पर बाहर हैं और उनकी जमानत की शर्तों के साथ कई तरह की पाबंदियां जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन पाबंदियों के दायरे में रहकर काम करने वाला कोई मंत्री अपने पद से जुड़ी सभी जिम्मेदारियों को पूरी तरह और प्रभावी ढंग से निभा सकता है।
केआरएस ने चेतावनी दी है कि यदि श्री नागेंद्र को मंत्रिमंडल से बाहर नहीं किया गया, तो पार्टी पूरे राज्य में उग्र आंदोलन छेड़ेगी और इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी।
श्री नागेंद्र ने वाल्मीकि निगम विवाद के दौरान ही अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हाल ही में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद उनकी वापसी ने इस मामले की राजनीतिक आग को फिर से भड़का दिया है।
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