नयी दिल्ली , मार्च 11 -- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने रक्त उत्पादों से संबंधित परीक्षण से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए मंत्रालय ने औषधि नियमावली 1945 में संशोधन के मसौदे पर लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।
मंत्रालय ने नौ मार्च 2026 को राजपत्र में जीएसआर 164(ई) का मसौदा जारी किया है। इसमें अनुसूची एफ के भाग 12-सी के तहत रक्त उत्पादों के परीक्षण से जुड़े प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य रक्त उत्पादों के परीक्षण नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है। इसके साथ ही ऐसे अतिरिक्त परीक्षणों को हटाने की योजना है, जो वैश्विक स्तर पर जरूरी नहीं माने जाते।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, मानव प्लाज्मा के पहले पूल की जांच हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और एचआईवी जैसे वायरस के लिए की जाती है। यदि ये परीक्षण नकारात्मक आते हैं, तभी उस प्लाज्मा का उपयोग दवाएं बनाने के लिए किया जाता है।
फिलहाल मौजूदा नियमों के तहत, इसी प्लाज्मा से बने अंतिम उत्पाद का भी दोबारा परीक्षण किया जाता है। इससे एक ही वायरस (विषाणु) के लिए दो बार जांच करनी पड़ती है, जो अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के अनुरूप नहीं है।
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