चंडीगढ़ , मई 15 -- पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही केंद्र सरकार ने आम लोगों पर महंगाई का नया बोझ डाल दिया है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को बहाना बनाकर केंद्र सरकार ने एलपीजी, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं, जिससे महंगाई की नई लहर पैदा होगी।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक कम रहने के बावजूद जनता को राहत नहीं दी गई और सरकार लगातार भारी टैक्स वसूलती रही। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के बजाय उनकी जेब खाली करने का काम किया है। श्री रंधावा ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और भारी टैक्स से परेशान लोग अब केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को समझ चुके हैं।

उन्होंने पंजाब सरकार से भी पेट्रोल और डीजल पर वैट में पांच -पांच रुपये की कटौती करने की मांग करते हुए कहा कि यदि आम आदमी पार्टी सरकार ने तुरंत वैट कम नहीं किया तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि केंद्र और पंजाब सरकार दोनों मिलकर जनता पर महंगाई का बोझ डाल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 से 2025 के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर औसतन 19.70 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 15.50 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगाई। इस दौरान 21 बार एक्साइज ड्यूटी में बदलाव किए गए, जिनमें 12 बार बढ़ोतरी शामिल थी।

उन्होंने कहा कि 27 मार्च 2026 को केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में कटौती की घोषणा का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंचा और वास्तविक फायदा तेल कंपनियों को मिला। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार केवल प्रचार और सुर्खियां बटोरने की राजनीति कर रही है।

श्री रंधावा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सोना न खरीदने" संबंधी संदेश की भी आलोचना करते हुए कहा कि यह संदेश देश के लगभग 3.5 करोड़ सुनारों, कारीगरों और श्रमिकों के लिए विनाश का संकेत बन गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है जिसका सीधा असर छोटे व्यापारियों और कारीगरों पर पड़ा है।

उन्होंने कहा कि ज्वेलरी उद्योग देश की जीडीपी में लगभग सात प्रतिशत योगदान देता है और करीब 50 लाख कारीगरों सहित 3.5 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है, लेकिन केंद्र सरकार की नीतियां इस क्षेत्र को आर्थिक संकट की ओर धकेल रही हैं।

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