नयी दिल्ली , जुलाई 16 -- केंद्र सरकार ने 'मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण नियम, 2014' में संशोधन संबंधी अधिसूचना जारी की है। इसमें उन अपीलीय प्राधिकारों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी गई है जिनके समक्ष अंग प्रत्यारोपण कानून के तहत पारित आदेशों के खिलाफ अपील की जा सकती है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 'मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण (दूसरा संशोधन) नियम, 2026' जारी किए हैं, जो 15 जुलाई, 2026 को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही लागू हो गये हैं। यह संशोधन 'मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994' की धारा 24 के तहत अधिसूचित किया गया है।
इस अधिसूचना के ज़रिए 2014 के नियमों के नियम 33(1) को बदल दिया गया है और अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत पारित आदेशों से असंतुष्ट लोगों के लिए अपील की एक स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है।
संशोधित नियमों के तहत, अधिनियम की धारा 9(6) के अंतर्गत 'प्राधिकरण समिति' के किसी आदेश से असंतुष्ट व्यक्ति आदेश मिलने की तारीख से 30 दिनों के भीतर अपील कर सकता है। राज्यों के मामले में ऐसी अपील संबंधित राज्य सरकार के समक्ष और केंद्र शासित प्रदेशों के मामले में संबंधित सरकार या प्रशासक के समक्ष की जाएगी।
संशोधन में अधिनियम की धारा 15(2) और 16(2) के तहत 'उचित प्राधिकरण' द्वारा पारित आदेशों के लिए भी अपीलीय अधिकारी का उल्लेख किया गया है। ऐसे आदेशों के खिलाफ भी अपील 30 दिनों के भीतर करनी होगी। राज्यों के मामले में अपील राज्य सरकार के समक्ष होगी, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों के मामले में इसकी सुनवाई केंद्र सरकार करेगी।
इस अधिसूचना से अंग दान या प्रत्यारोपण के लिए पात्रता मानदंडों, अस्पतालों के पंजीकरण, या अंग निकालने और प्रत्यारोपण से जुड़ी प्रक्रियाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका एकमात्र उद्देश्य अपील से संबंधित मौजूदा उप-नियम को बदलना और अधिनियम के तहत जारी विभिन्न श्रेणियों के आदेशों के लिए सक्षम अपीलीय अधिकारी की स्पष्ट पहचान करना है।
यह संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और उम्मीद है कि इससे 'मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994' के तहत प्रशासनिक फैसलों को चुनौती देने की प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता आएगी।
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