मुंबई , अक्टूबर 04 -- शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सुनियोजित तरीके से लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया है।

श्री ठाकरे ने रविवार को मुंबई मेट्रो सिनेमा से निकाले गए विशाल मार्च के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) मुख्यालय के बाहर विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाए और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली चयन समिति से मुख्य न्यायाधीश को हटाकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जैसे सरकार द्वारा चुने गए मंत्रियों को जगह दी गयी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की सुनियोजित साजिश चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में दो करोड़ और देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गये हैं। उन्होंने इन कार्रवाइयों को शासन नहीं, बल्कि सीधे तौर पर 'वोट चोरी' करार दिया।

उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली चयन समिति के पुनर्गठन की आलोचना की और आरोप लगाया कि केंद्रीय सत्ता से जुड़े लोगों ने चुनाव आयोग के माध्यम से चुनावी तंत्र में हेरफेर करने के लिए अधिकार अपने हाथ में ले लिये हैं। श्री ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में मतदाता सूचियों से लाखों नाम कथित तौर पर अवैध तरीके से हटाए गए हैं। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए अस्तित्व का संकट बताया।

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने विपक्ष के खिलाफ पहले लगाए गए भ्रष्टाचार विरोधी आरोपों का जवाब देते हुए यह आरोप भी लगाया कि सत्तारूढ़ दल ने वोट चोरी करने की कला में महारत हासिल कर ली है। उन्होंने लोगों से देश की हर गली और हर कोने में इस कथित धोखाधड़ी को उजागर करने की अपील की।

श्री ठाकरे ने राज्य में गहराते कृषि संकट का मुद्दा उठाया और सूखे तथा कर्ज के कारण आत्महत्या करने को मजबूर किसानों की दुर्दशा की अनदेखी करने तथा राजनीतिक जोड़-तोड़ और दलों में विभाजन को प्राथमिकता देने के लिए सरकार की आलोचना की।

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