नयी दिल्ली, मई 22 -- पुराने दर्द, तंत्रिका रोग, फाइब्रोमायल्जिया और कुछ तंत्रिका संबंधी स्थितियों के उपचार के लिए निर्धारित दवा प्रेगाबालिन के युवाओं में बढ़ते दुरुपयोग ,शीघ्रता से दर्द दूर करने, मनोस्थिति ठीक रखने और अवसाद दूर करने संबंधी रिपोर्टों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे अनुसूची एच1 के अंतर्गत विनियमित किया है। देश के कुछ हिस्सों से हाल ही में अवैध रूप से इस दवा को भंडारित और अनधिकृत रूप से बेची गई प्रेगाबालिन की खेप जब्त होने की भी सूचना मिली है।
कुछ राज्यों से प्राप्त रिपोर्टों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इन रिपोर्टों में विशेष रूप से युवाओं में प्रेगाबालिन के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों का उल्लेख है।
इस अधिसूचना के साथ, प्रेगाबालिन को अब औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन नियम, 1945 के अंतर्गत वर्तमान अनुसूची एच के बजाय अनुसूची एच1 के सख्त प्रावधानों के अंतर्गत विनियमित किया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 की अनुसूची एच1 के अंतर्गत औषधि 'प्रेगाबालिन' को शामिल करने के लिए भारत के राजपत्र में 20 मई, को एक अधिसूचना जारी की है।
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