चेन्नई , अक्टूबर 25 -- तमिलनाडु सरकार की ओर से केंद्र सरकार से भारी बारिश के मद्देनजर 22 प्रतिशत नमी वाले धान की खरीद करने का अनुरोध करने के बाद केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन विशेषज्ञ टीमों ने आज कावेरी डेल्टा क्षेत्र सहित वर्षा प्रभावित जिलों में धान की गुणवत्ता का तीन दिवसीय आकलन शुरू किया।
अधिकारियों ने बताया कि दो टीमों का नेतृत्व खाद्य मंत्रालय के उप निदेशक कर रहे थे जबकि दूसरी टीम का नेतृत्व सहायक निदेशक कर रहे थे।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से हाल ही में हुई बारिश से प्रभावित धान की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए इन टीमों को नियुक्त किया गया था। तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के लिए खरीद मानदंडों में 17 प्रतिशत की अनुमेय सीमा से 22 प्रतिशत तक ढील देने का आग्रह किया था। टीमों ने नमी की मात्रा का निरीक्षण करने के लिए कावेरी डेल्टा क्षेत्रों सहित विभिन्न जिलों का दौरा किया, किसानों से बातचीत की और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श भी किया।
केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार टीम भारतीय खाद्य निगम और तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों के साथ समन्वय में वर्षा प्रभावित जिलों से धान के नमूने एकत्र करेगी।
हाल ही में हुई बारिश के कारण काटे गए धान में नमी का स्तर बढ़ गया था जिससे वह केंद्रीय पूल के मौजूदा खरीद मानकों के अनुरूप नहीं था। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर खरीद मानदंडों में ढील देने की मांग की।
टीम धान में नमी की मात्रा का मौके पर ही आकलन करेंगी और केंद्रीय कृषि मंत्रालय को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगी जिसके बाद केंद्र तमिलनाडु के अनुरोध को स्वीकार करने पर निर्णय लेगा।
धान खरीद केंद्रों का दौरा करने के अलावा केंद्रीय टीमों की ओर से 16 अक्टूबर को पूर्वोत्तर मानसून के आगमन के बाद से राज्य में हो रही भारी बारिश के कारण खड़ी फसलों को हुए नुकसान का भी निरीक्षण करने की उम्मीद थी।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि टीमों ने आज चेंगलपट्टू, तंजावुर, मयिलादुथुराई, तिरुचिरापल्ली और पुदुकोट्टई जिलों में धान की गुणवत्ता का निरीक्षण किया।
टीम शनिवार को तिरुवल्लूर, कांचीपुरम, तिरुवरुर, नागपट्टिनम, मदुरै और थेनी जिलों में और सोमवार को कुड्डालोर और अन्य वर्षा प्रभावित जिलों में अपना निरीक्षण जारी रखेंगी।
केंद्र ने कहा कि एकत्र किए गए सभी धान के नमूनों का परीक्षण तमिलनाडु स्थित भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) प्रयोगशालाओं में किया जाना चाहिए और अपनी सिफारिशों के साथ एक विस्तृत और समेकित रिपोर्ट खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय को प्रस्तुत करेगी। मंत्रालय रिपोर्ट के आधार पर इस पर विचार करेगी कि क्या किसानों के हितों की रक्षा और निरंतर खरीद सुनिश्चित करने के लिए खरीद मानदंडों में अस्थायी छूट आवश्यक है।
केंद्रीय टीमों का यह दौरा प्रत्यक्ष खरीद केंद्रों के माध्यम से धान खरीद में देरी पर विपक्ष की आलोचनाओं के बाद हुआ है।
टीमें सोमवार को चेन्नई लौट आएंगी और दिल्ली रवाना होने से पहले राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और उच्च अधिकारियों के साथ चर्चा भी करेगी।
गौरतलब है कि तमिलनाडु सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर खरीफ सीजन के दौरान हाल ही में हुई व्यापक बारिश से हुए नुकसान का हवाला देते हुए 22 प्रतिशत तक नमी वाले धान की खरीद की अनुमति मांगी थी।
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