बेंगलुरु , अक्टूबर 05 -- कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार को बताया कि तीन केंद्रीय टीमें राज्य के सूखा-प्रभावित ज़िलों का दौरा कर रही हैं और सरकार द्वारा बताई गई फ़सलों के नुकसान तथा हालात की ज़मीनी स्तर पर जांच कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि वित्तीय सहायता पर केंद्र का फ़ैसला काफ़ी हद तक टीमों द्वारा ज़मीनी जांच के बाद सौंपी जाने वाली रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।
डॉ. परमेश्वर ने यहाँ पत्रकारों से कहा, "तीन केंद्रीय टीमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रही हैं। हमने लगभग 1,000 पन्नों की रिपोर्ट और सूखा-प्रभावित इलाकों की सूची सौंपी थी। अब वे ज़मीनी स्तर पर जाकर यह जांच कर रही हैं कि हमारी रिपोर्ट में बताई गई स्थितियां असल में मौजूद हैं या नहीं।"उन्होंने कहा कि टीमों के मंगलवार तक अपना आकलन पूरा करने और केंद्र को रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है। राज्य सरकार पहले ही केंद्रीय टीमों को नुकसान के दायरे के बारे में जानकारी दे चुकी है।
मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और डॉ. परमेश्वर ने व्यक्तिगत रूप से टीमों से मुलाक़ात की और उनसे सूखा आकलन के दूसरे चरण में पहचाने गए 27 अतिरिक्त तालुकों का भी दौरा करने का आग्रह किया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, "टीमें लगभग सभी ज़िलों का दौरा कर रही हैं। कुछ जगहों पर उन्होंने सीधे किसानों से बात की है और खेतों का दौरा किया है। वे वास्तविक स्थिति देख रही हैं और हमारे द्वारा किए गए ज़मीनी आकलन की पुष्टि कर रही हैं।"डॉ. परमेश्वर के अनुसार राज्य ने 177 तालुकों में लगभग 46,000 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया है और सूखा सहायता के तौर पर केंद्र से लगभग 10,000-11,000 करोड़ रुपये की मांग की है। राज्य अब केंद्र के साथ बातचीत के अगले दौर की तैयारी कर रहा है।
उन्होंने कहा, "हमने मुख्यमंत्री और मेरे नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के तौर पर जाने का फ़ैसला किया है। जब हम जाएंगे, तो हम अपनी मांग रखेंगे और कर्नाटक के लिए ज़रूरी सहायता की मांग करेंगे।" केंद्रीय आकलन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य सरकार का अपना नुकसान का आकलन, केंद्र से मांगी गई राहत राशि से काफी ज़्यादा है। फील्ड टीमों की रिपोर्ट से केंद्र को फसल के नुकसान और प्रभावित इलाकों के हालात का अंदाज़ा मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि कई ज़िलों के किसानों ने पहले ही फसल के नुकसान की जानकारी दी है, और राज्य सरकार का कहना है कि सूखे के हालात ने बड़ी संख्या में तालुकों में खेती-बाड़ी और ग्रामीण आजीविका पर बुरा असर डाला है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित