लखनऊ, अप्रैल 08 -- ) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लखनऊ में छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 का शुभारंभ करते हुए कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए स्पष्ट और दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया।
योगी ने कहा कि अब समय आ गया है कि कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे उत्पादकता, लाभप्रदाता और अंततः समृद्धि तक ले जाया जाए। उन्होंने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब देश का अन्नदाता समृद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन दिवसीय इस कांग्रेस के माध्यम से कृषि के विभिन्न आयामों पर गंभीर मंथन होगा और यह मंच केवल चर्चा का नहीं, बल्कि ठोस कार्ययोजना तैयार करने का माध्यम बनना चाहिए।
उन्होंने बताया कि सीमित कृषि योग्य भूमि के बावजूद उत्तर प्रदेश देश के खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 21 प्रतिशत योगदान दे रहा है, जो किसानों की मेहनत और सरकार की योजनाओं का परिणाम है।
कृषि को देश की आर्थिक शक्ति का आधार बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक थी, जिसका मूल कारण सशक्त कृषि तंत्र था।
उन्होंने कहा कि समय के साथ किसान केवल कच्चा माल उत्पादक बनकर रह गया, जिससे आर्थिक असंतुलन पैदा हुआ और उसे कर्ज के बोझ का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री ने 'प्रयोगशाला से खेत तक' की पारंपरिक अवधारणा को बदलते हुए 'ज़मीन एक प्रयोगशाला है' का मंत्र दिया और कहा कि अब खेतों को ही नवाचार की प्रयोगशाला बनाना होगा। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों को इस दिशा में अहम भूमिका निभाने का आह्वान किया।
डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को अब बाजार, मौसम और मूल्य की जानकारी सीधे उपलब्ध हो रही है। 'वन नेशन-वन मंडी' और मंडी शुल्क में कमी जैसे कदमों से किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं।
गन्ना क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अधिकांश चीनी मिलें 6-7 दिनों के भीतर गन्ना मूल्य का भुगतान कर रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश देश के कुल गन्ना उत्पादन का लगभग 55 प्रतिशत योगदान दे रहा है और एथेनॉल उत्पादन में भी अग्रणी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले कृषि क्षेत्र अव्यवस्था और अविश्वास का प्रतीक बन गया था, लेकिन उसके बाद सरकार ने पारदर्शी और तकनीक आधारित नीतियों के माध्यम से किसानों का विश्वास बहाल किया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रभावी खरीद और डीबीटी के जरिए सीधे भुगतान से किसानों को बड़ा लाभ मिला है।
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