उदयपुर , अगस्त 08 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने युवाओं काआह्वान किया है कि वे कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को केवल परंपरागत व्यवसाय के रूप में नहीं देखें, बल्कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और उद्यमिता से जोड़कर इसे रोजगार और समृद्धि का सशक्त माध्यम बनायें।

श्री बागडे शनिवार को महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से संबद्ध राजस्थान कृषि महाविद्यालय सभागार में एग्रीविजन के नॉर्थ वेस्ट जोन की द्वितीय कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ समारोह को मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि कृषि और इससे जुड़े संबद्ध व्यवसाय भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे हैं और आज भी देश की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। मध्यकालीन भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव कृषि एवं इससे जुड़े व्यवसायों पर टिकी थी। समय के साथ कृषि तकनीकों में भी अनेक नवाचार हुए, जो भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रमाण हैं।

उन्होंने युवाओं को परंपरागत कृषि आधारित व्यवसायों से जुड़ने तथा उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज कृषि क्षेत्र में तकनीक, अनुसंधान, स्टार्टअप, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। युवा इन अवसरों को पहचानकर कृषि को उद्यमिता से जोड़ सकते हैं। दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार और उद्यमिता विकास में युवाओं की भूमिका पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा।

राज्यपाल ने मेवाड़ की ऐतिहासिक एवं सामरिक महत्ता का उल्लेख करते हुए महाराणा प्रताप के संघर्ष और दूरदर्शिता को याद किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप न केवल आत्म गौरव और राष्ट्र रक्षा के लिए युद्ध नहीं किये, अपितु विपरीत परिस्थितियों में भी कृषि और जनजीवन के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए। उनका जीवन युवाओं को कठिन परिस्थितियों में भी आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और नवाचार के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

श्री बागडे ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक समृद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, महर्षि भार्गव, महर्षि पाराशर सहित अनेक ऋषि-मुनियों ने अपने प्रयोगों और अनुसंधानों से ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिक परंपरा में प्रकृति, कृषि, गणित और खगोल विज्ञान से जुड़े अनेक ऐसे ज्ञान-विषय मौजूद रहे हैं, जिनकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी गौरवशाली ज्ञान परंपरा को समझें और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के साथ उसका समन्वय करते हुए नए प्रयोग करें।

उन्होंने महिला शक्ति के महत्व को भी रेखांकित करते हुए डूंगरपुर की वीर बाला कालीबाई, बीकानेर की किरण देवी, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, उद्योगपति सुधा मूर्ति तथा इंजीनियर कमला भागवत जैसी महिलाओं के प्रेरक प्रसंग सुनाये। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने इतिहास से लेकर आधुनिक विज्ञान, शिक्षा, उद्योग और राष्ट्र निर्माण तक हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध की है। युवाओं को इन प्रेरणादायी व्यक्तित्वों से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। समारोह में राज्यपाल ने एग्रीविजन की स्मारिका का विमोचन किया। इसके साथ ही महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।

श्री बागडे ने महाराणा प्रताप सभागार के बाहर संत रविदास के जीवन एवं विचारों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसकी सराहना की। उन्होंने युवाओं से संत रविदास जी के जीवन एवं संदेश से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इस दौरान श्री बागडे ने राजस्थान कृषि महाविद्यालय परिसर में महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

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