कुशीनगर , सितम्बर 24 -- अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र कुशीनगर में आने वाले पर्यटकों को महज महापरिनिर्वाण मंदिर और अन्य बौद्ध स्थलों तक सीमित रखने के बजाय अब उन्हें गांवों के जीवन और ग्रामीण परिवेश से जोड़ने की तैयारी तेज हो रही है।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पिछले वर्ष लागू की गई रूरल होम स्टे (ग्रामीण होम स्टे) और बी एंड बी (ब्रेड एंड ब्रेक फास्ट) योजना को लेकर करीब एक साल बाद स्थानीय स्तर पर रुझान दिखने लगा है। ग्रामीण क्षेत्र में पांच लोगों ने होम स्टे के लिए आवेदन किया है, तो शहरी क्षेत्र में एक संचालक ने पंजीकरण कराया है।

नई पर्यटन नीति में इन योजनाओं के नियमों में भी ढील दी गई है। इसका उद्देश्य कम आय वाले भारतीय और विदेशी पर्यटकों को अपेक्षाकृत किफायती दर पर ठहरने और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार का अवसर देना है।

नई व्यवस्था के तहत अब होम स्टे और बी एंड बी में छह के बजाय अधिकतम आठ कमरे यानी 16 बेड तक की व्यवस्था की जा सकेगी। पर्यटन सूचना अधिकारी डाॅ. प्राण रंजन ने बताया कि नई पर्यटन नीति के तहत ग्रामीण क्षेत्र में रूरल होम स्टे के लिए अब तक पांच आवेदन आए हैं। शहरी क्षेत्र में बी एंड बी योजना के तहत एक संचालक का पंजीकरण हो चुका है।

रूरल होम स्टे योजना के तहत पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश में आवास और भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। संचालक पर्यटकों को गांव के रहन-सहन, खान-पान और स्थानीय जीवनशैली से भी परिचित कराएंगे।

कुशीनगर आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए यह बौद्ध स्थलों की यात्रा के साथ ग्रामीण जीवन को करीब से देखने का नया अनुभव बन सकता है। योजना में भवन स्वामी का उसी भवन में स्वयं निवास करना अनिवार्य होगा। वहीं शहरी क्षेत्र में संचालित बी एंड बी योजना में भवन स्वामी के स्थान पर केयरटेकर के रहने की व्यवस्था की गई है।

नई पर्यटन नीति में संचालकों के लिए पुलिस विभाग से चरित्र प्रमाण पत्र लेने की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। अब स्व प्रमाणित प्रमाण पत्र मान्य होगा। इससे लोगों के लिए योजना से जुड़ने की प्रक्रिया पहले की अपेक्षा आसान हो गई है।

पर्यटन विभाग का मानना है कि कुशीनगर में बौद्ध पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं के बीच होम स्टे योजना को ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार मिलने से पर्यटकों के ठहराव के विकल्प बढ़ेंगे। इससे पर्यटन से होने वाली आय का लाभ गांवों तक पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी मदद मिल सकती है।

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