कुशीनगर , अक्टूबर 23 -- कुशीनगर में दूध निकालने के बाद गोवंशी को खुला छोड़ने वाले पशुपालकों की अब आसानी से पहचान हो सकेगी।

पशुओं की खरीद-बिक्री से लेकर उनकी पहचान तक के लिए डिजिटल निगरानी की व्यवस्था लागू की जा रही है। भारत पशुधन एप पर पशुओं का पंजीकरण होगा, इसके साथ ही इयर टैगिंग कराई जाएगी। टैग पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही पशु और उसके पंजीकृत पशुपालक का ब्योरा सामने आ जाएगा। इसके साथ ही नेशनल डिजिटल लाइव स्टाक मिशन के तहत पशुओं की खरीद-बिक्री का रिकार्ड भी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। पिछले एक दशक से प्रदेश में बेसहारा पशुओं के कारण फसल में नुकसान और बढ़ते हादसे का परेशानी बने हैं।

इस संबंध में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. शांति प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि पशुपालन विभाग के अंतर्गत संचालित योजना में दुधारू पशुओं की संख्या को पोर्टल पर ब्लाकवार दर्ज की जाएगी। पशुओं की गणना पूर्व में हो चुकी है। इसके साथ ही पशुओं की ईयर टैगिंग होगी, इस टैग में पशुपालक का ब्यौरा दर्ज होगा। जिसे स्कैन कर पता लगाया जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि मुख्य उद्देश्य घूमने वाले पशुओं को रोकना है। गांव, ब्लाक, तहसील और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा। ग्राम स्तर पर पंचायत सहायक, ब्लाक स्तर पर पशु चिकित्सा अधिकारी और तहसील स्तर पर एसडीएम की देखरेख में निगरानी होगी।

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