कुशीनगर , मई 20 -- उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सीमावर्ती जनपद होने के कारण कुशीनगर में उर्वरकों के वितरण में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा अवैध आपूर्ति नहीं होनी चाहिए। श्री शाही ने बुधवार को निर्माणाधीन महात्मा गौतम बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान कृषि मंत्री ने कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए तथा आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त मैनपॉवर लगाकर कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराया जाए।

कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों ने मंत्री को बताया कि एकेडमिक ब्लॉक, लेक्चर हॉल, टाइप-1 एवं टाइप-2 आवास, बालक एवं बालिका छात्रावासों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है तथा वर्तमान में फिनिशिंग का कार्य चल रहा है। इसके अलावा विश्वविद्यालय भवन की संरचना और गेस्ट हाउस का निर्माण भी पूर्ण कर लिया गया है।

कृषि मंत्री ने निर्देश दिया कि कृषि विश्वविद्यालय का संपूर्ण निर्माण कार्य हर हाल में जुलाई 2026 के अंत तक पूरा कर लिया जाए। उन्होंने मुख्य मार्ग से विश्वविद्यालय को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग के निर्माण कार्य को भी शीघ्र शुरू कराने के निर्देश दिए। निरीक्षण के बाद मंत्री ने कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर विभागीय योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने डेंचा बीज की उपलब्धता एवं वितरण, यूरिया और डीएपी की उपलब्धता, फार्मर रजिस्ट्री तथा अन्य योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली।

श्री शाही ने कहा कि डेंचा बीज अधिक से अधिक किसानों को वितरित किया जाए तथा इसकी बुवाई सुनिश्चित कराई जाए, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़े और फसल उत्पादन में सुधार हो। उन्होंने योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने, उर्वरकों के वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने तथा किसानों को उनकी भूमि के रकबे के अनुसार ही यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

कृषि मंत्री ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण उर्वरकों की अवैध आपूर्ति रोकने के लिए विशेष निगरानी जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिया कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि के आधार पर ही किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं।

विभागीय अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि जनपद में वर्तमान समय में यूरिया, डीएपी तथा डेंचा बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। भविष्य की मांग को देखते हुए अतिरिक्त उर्वरकों की उपलब्धता के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी, कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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