कुशीनगर , अक्टूबर 30 -- इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री के दूसरे संस्करण और इन-स्पेस कैन-7यूसैटइंडिया स्टूडेंट कॉम्पिटिशन 2026 के तीसरे संस्करण के लिए, छात्रों की कुल 115 टीमों ने पंजीकरण किया जिनमें से से 77 टीमों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इसका ग्रैंड फिनाले, जिसे स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय नारायणी रॉकेट कप के नाम से जाना जाता है, कुशीनगर के पिपराघाट स्थित 'नारायणी मॉडल रॉकेट्री लॉन्च पैड' पर 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा।

इसरो और श्रीनारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन (एसएसडीएफ) के सहयोग से इन-स्पेस द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता के तहत स्नातक की पढ़ाई कर रहे (अंडरग्रेजुएट) छात्रों को तय मिशन की आवश्यकताओं के अनुसार मॉडल रॉकेट और छोटे (मिनिएचर) उपग्रहों को डिज़ाइन करने, विकसित करने और लॉन्च करने का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाता है।

इस स्थान का चुनाव इसलिए किया गया है कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी दूर-दराज़ के लोगों तक पहुंच सके।

देवरिया से सांसद, शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा , "मुझे खुशी है कि मेरे लोकसभा क्षेत्र में इन-स्पेस छात्र रॉकेट्री प्रतियोगिता के तीसरे संस्करण का आयोजन हो रहा है। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम को तमकुही राज विधानसभा क्षेत्र के दूर-दराज़ इलाके में लाने से न केवल मेरे क्षेत्र और देश भर के युवाओं की कल्पनाशीलता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह भी पता लगाने के अवसर पैदा होंगे कि इस क्षेत्र के विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग किस तरह किया जा सकता है।"इन स्पेस के अध्यक्ष, डॉ. पवन गोयनका ने इस प्रतियोगिता के उद्देश्य के बारे में कहा , "मज़बूत अंतरिक्ष परितंत्र के लिए ऐसे कुशल कार्यबल की आवश्यकता होती है, जो अंतरिक्ष प्रणालियों को डिज़ाइन करने, बनाने और संचालित करने में सक्षम हो। ये प्रतियोगिताएं छात्रों को अपने इंजीनियरिंग ज्ञान को व्यावहारिक चुनौतियों में लागू करने, मिशन डिज़ाइन और उसके क्रियान्वयन की जटिलताओं को समझने, और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर प्रदान करती हैं। इन-स्पेस ऐसी पहलों के ज़रिये, युवा प्रतिभाओं को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर बनाने और भारत के बढ़ते अंतरिक्ष इकोसिस्टम में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है।"मॉडल रॉकेट्री चैलेंज में टीमों को एक किलोग्राम पेलोड वाला रॉकेट एक किलोमीटर की ऊंचाई तक लॉन्च करना होता है। इसमें उन्हें रॉकेट की उड़ान की स्थिरता, पेलोड को सुरक्षित रूप से अलग करने और उसे वापस सुरक्षित लाने (रिकवरी) का प्रदर्शन करना होता है। कैन-7यूसैटचैलेंज में, टीमों को एक किलोग्राम से कम वज़न वाला और कैन (डिब्बे) के आकार का सैटेलाइट बनाना होता है। इसमें पावर, इंस्ट्रूमेंटेशन, टेलीमेट्री और नियंत्रित तरीके से नीचे उतरने (कंट्रोल्ड डिसेंट) के लिए आवश्यक प्रणाली लगी होनी चाहिए।

टीमों का मूल्यांकन अलग-अलग समितियां करेंगी, जिनमें इसरो, इन-स्पेस, डीआरडीओ, शैक्षणिक संस्थानों और एयरोस्पेस उद्योग के विशेषज्ञ शामिल होंगे। इन समितियों में इसरो के पूर्व सहायक निदेशक रॉय एम. चेरियन और डॉ. सुरेंद्र पाल के साथ-साथ अंतरिक्ष क्षेत्र के अन्य अनुभवी पेशेवर भी शामिल हैं।

ग्रैंड फिनाले के दौरान एक से तीन नवंबर तक 'अंतरिक्ष रोज़गार मेला 2026' का भी आयोजन किया जाएगा। यह मेला प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों को प्रक्षेपण यान (लॉन्च व्हीकल) प्रौद्योगिकी उपग्रह निर्माण और वांतरिक्ष (एयरोस्पेस) अनुसंधान एवं विकास जैसे क्षेत्रों के संभावित नियोक्ताओं से जोड़ेगा।

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