बेंगलुरु , अगस्त 09 -- केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने रविवार को प्रस्तावित बिदादी वृहत बेंगलुरु एकीकृत शहरीकरण को लेकर कर्नाटक सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक पूर्व विधायी समिति पहले ही इस परियोजना की जांच कर अपनी रिपोर्ट दर्ज कर चुकी है, तो फिर नयी समिति की क्या जरूरत है।
श्री कुमारस्वामी ने कहा कि पिछली समिति का गठन कांग्रेस के नेतृत्वा वाली सरकार के दौरान तब किया गया था, जब सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थीं और मल्लिकार्जुन खरगे पार्टी के प्रमुख नेता थे। उन्होंने दावा किया कि उस समिति की रिपोर्ट में बिदादी परियोजना और किसानों की चिंताओं का व्यापक रूप से अध्ययन किया गया था। उन्होंने बताया कि समिति ने बिदादी क्षेत्र का दौरा किया था, किसानों से संवाद किया था और नारियल, आम तथा इमली के बागानों सहित क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि का विवरण दर्ज किया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह दर्ज किया गया था कि उनके कार्यकाल के दौरान किसानों की भूमि अधिग्रहण के लिए कोई प्रारंभिक अधिसूचना या निर्देश जारी नहीं किया गया था।उन्होंने प्रश्न किया, "कांग्रेस को पहले अपनी समिति की रिपोर्ट पढ़नी चाहिए। अब दूसरी समिति की जरूरत क्या है?"श्री कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार उस पिछली विधायी समिति के सदस्य थे और उन्होंने सरकार की एक और समिति गठित करने के निर्णय पर सवाल खड़े किये। उन्होंने याद दिलाया कि 2007 में विधानसभा में कहा था कि यदि बिदादी परियोजना का किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो इसकी अनुमति नहीं दी जायेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने कभी भी जनविरोधी विकास का समर्थन नहीं किया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह परियोजना को बढ़ावा देने के लिए विज्ञापनों का सहारा ले रही है, जबकि किसानों और ग्रामीणों की आशंकाओं का समाधान करने में पूरी तरह विफल रही है।
कर्नाटक सरकार ने भूमि अधिग्रहण की आशंका का सामना कर रहे किसानों और ग्रामीणों के बढ़ते विरोध के बीच प्रस्तावित बिदादी वृहद बेंगलुरु एकीकृत शहरीकरण परियोजना की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश गुहानाथन नरेंद्र की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
श्री कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार को परियोजना का प्रचार-प्रसार बंद करना चाहिए और इसके बजाय उन लोगों की चिंताओं को दूर करना चाहिए जिनकी भूमि और आजीविका इससे प्रभावित हो सकती है।
बेंगलुरु-मैसूरु इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (नाइस) परियोजना का जिक्र करते हुए श्री कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि लगभग तीन दशकों में बुनियादी ढांचे के विकास के नाम पर किसानों की जमीन लूटी गयी है और दावा किया कि कई परिवार विस्थापित हुए हैं। उन्होंने बेंगलुरु-मैसूरु सड़क परियोजना की परिकल्पना में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की भूमिका का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि इसका मूल उद्देश्य कर्नाटक को बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान करना था। उन्होंने पूछा, "क्या श्री देवेगौड़ा ने किसी से परियोजना के नाम पर किसानों को धोखा देने और उनकी जमीन लूटने के लिए कहा था?"श्री कुमारस्वामी ने कहा कि इसके बाद किसानों ने श्री देवेगौड़ा से संपर्क किया था और परियोजना के कार्यान्वयन में हुई कथित अनिमितताओं को उनके संज्ञान में लाया था। उन्होंने दावा किया कि श्री देवेगौड़ा ने ऐसी गतिविधियों के खिलाफ लगातार अपनी आवाज उठायी है और कहा कि परियोजना से जुड़ी अनियमिताओं के खिलाफ उनका अपना विरोध भी हमेशा कायम रहा है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय की हालिया खंडपीठ के निर्णय का संदर्भ देते हुए श्री कुमारस्वामी ने कहा कि 'नाइस' का मुद्दा एक बार फिर न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गया है और दावा किया कि उनकी आलोचना अदालती आदेशों तथा आधिकारिक दस्तावेजों पर आधारित है। उन्होंने 'नाइस' टोल मुद्दे पर मंत्री प्रियांक खरगे को भी निशाने पर लिया और तर्क दिया कि बेंगलुरु-मैसूरु इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर कर्नाटक सरकार की परियोजना है, न कि कोई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना।
श्री कुमारस्वामी ने दावा किया कि टोल के रूप में लगभग 2,000 करोड़ रुपये पहले ही वसूले जा चुके हैं और उन्होंने इस परियोजना पर बनी एक पिछली विधायी समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने सवाल किया कि सरकार पिछली रिपोर्टों में उठाये गये मुद्दों पर कार्रवाई करने में क्यों विफल रही और इसके बजाय परियोजना का बचाव क्यों करती रही।
श्री कुमारस्वामी ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है। उन्होंने भर्तियों तथा परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर विपक्ष के बार-बार के हस्तक्षेप के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न करने का सरकार पर आरोप लगाया। उन्होंने आंतरिक आरक्षण पर एक पूर्व समिति के सिलसिले में 86 करोड़ रुपये के कथित खर्च का हवाला देते हुए समितियों पर सरकार की बार-बार की निर्भरता पर सवाल उठाये।
श्री कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार को समितियां बनाने और विज्ञापन जारी करने के बजाय लोगों की समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने सत्ताधारी व्यवस्था को चेतावनी दी कि जनता अगले चुनाव में अपना जनादेश दे देगी।
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