बेंगलुरु , जुलाई 10 -- सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उपक्रमों (पीएसयू) के भविष्य को लेकर केंद्र और कर्नाटक सरकार के बीच जारी टकराव के बीच केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने एचएमटी की भूमि पर राज्य सरकार के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर रणनीतिक पीएसयू की मदद करने की बजाय उनके पुनरुद्धार में बाधाएं खड़ी करने का आरोप लगाया है।
श्री कुमारस्वामी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में उन आरोपों को सिरे से नकार दिया, जिनमें कहा गया था कि एचएमटी ने वन भूमि पर अतिक्रमण किया है। उन्होंने आधिकारिक दस्तावेज जारी करते हुए स्पष्ट किया कि इस संपत्ति को 1960 में ही कानूनी रूप से वन भूमि की सूची से बाहर कर दिया गया था और वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने के बाद इसे एचएमटी को हस्तांतरित किया गया था। उन्होंने कहा, "वन विभाग का एचएमटी की जमीन से कोई लेना-देना नहीं है और राज्य सरकार का इस पर कोई दावा नहीं बनता। जो भी आरोप लगा रहे हैं, वे दस्तावेजों की जांच करने के लिए स्वतंत्र हैं।"श्री कुमारस्वामी ने पूर्व वन मंत्री और वर्तमान पंचायत राज मंत्री ईश्वर खंड्रे पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि वह अन्य स्थानों पर बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमणों को नजरअंदाज कर केवल एचएमटी की जमीन को ही क्यों निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, "वन मंत्री के रूप में अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान आपने वास्तव में कितनी वन भूमि वापस ली? वन भूमि के विशाल हिस्सों पर अवैध कब्जे हैं, पहले उसका जवाब दें।"केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि श्री खंड्रे छह दशक से भी पहले कानूनी रूप से वन क्षेत्र से बाहर की गयी जमीन को अतिक्रमण के रूप में पेश कर राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप लगा रहे हैं।
श्री कुमारस्वामी ने कहा कि एचएमटी भूमि विवाद पहले से ही उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है। जब इस प्रतिष्ठित उपक्रम के लिए पुनरुद्धार पैकेज सुरक्षित करने के प्रयास अंतिम चरण में पहुंचे, ठीक उसी समय वन विभाग के एक अधिकारी ने एचएमटी को जमीन खाली करने का मनमाना नोटिस जारी कर दिया।
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