नैनीताल , अक्टूबर 31 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हल्द्वानी के लामाचौड़ स्थित एक शिक्षण संस्थान से बीबीए और बीसीए पाठ्यक्रमों की संबद्धता के लिए 35 लाख रुपये सुरक्षा धनराशि मांगने के मामले में याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दी है।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक संस्थान से 14 दिसंबर 2016 के शासनादेश के आधार पर कोई सुरक्षा जमा नहीं लिया जाए। न्यायालय ने प्रतिवादियों को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं।
मामला एमआईईटी कुमाऊं शिक्षा नगर की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। संस्थान ने कुमाऊं विश्वविद्यालय के सात जुलाई 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें बीबीए और बीसीए पाठ्यक्रमों की संबद्धता के लिए 35 लाख रुपये की सुरक्षा धनराशि जमा कराने को कहा गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय में दलील दी गई कि विश्वविद्यालय की यह मांग मनमानी है और यूजीसी के प्रावधान के विपरीत है। याचिकाकर्ता का कहना था कि संस्थान एआईसीटीई से विनियमित है इसलिए उससे अलग से सुरक्षा धनराशि की मांग नहीं की जा सकती।
याचिका में उच्च न्यायालय के फैसले का भी हवाला दिया गया। इस फैसले के अनुसार 14 दिसंबर 2016 का शासनादेश उन संस्थाओं पर लागू होगा, जो किसी कानून या अन्य नियामक व्यवस्था के तहत विनियमित नहीं हैं।
मामले की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने प्रतिवादियों को छह सप्ताह में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने को कहा। साथ ही अगली सुनवाई तक उक्त शासनादेश के आधार पर याचिकाकर्ता संस्थान से सुरक्षा धनराशि नहीं लेने के निर्देश दिए। अदालत ने स्टे एप्लीकेशन का भी निस्तारण कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई चार फरवरी 2027 को होगी।
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