नयी दिल्ली , अप्रैल 18 -- वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही रिपोर्ट को शनिवार को फर्जी बताते हुए कहा कि बाहर जाने वाले हर भारतीयों को आयकर स्वीकृति प्रमाण-पत्र ( आईटीसीसी) लेना जरूरी है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया, "आयकर की धारा 230 के तहत, कर मंजूरी प्रमाणपत्र सभी के लिए अनिवार्य नहीं हैं। इनकी आवश्यकता केवल कुछ कानूनी परिस्थितियों में विशिष्ट व्यक्तियों के लिए होती है।" वित्त मंत्रालय ने कहा है कि 2024 के वित्त अधिनियम (संख्या 2) के अंतर्गत संशोधनों के बाद भी, देश से बाहर जाने वाले व्यक्तियों के लिए आयकर सुकृति प्रमाण पत्र संबंधी यह नियम 2003 से अपरिवर्तित है।
गत 20 अगस्त 2024 को भी जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') की धारा 230 (1ए) कुछ विशेष परिस्थितियों में भारत में निवास करने वाले व्यक्तियों द्वारा कर निकासी प्रमाण पत्र प्राप्त करने से संबंधित है। यह प्रावधान, अपने वर्तमान स्वरूप में, वित्त अधिनियम, 2003 के माध्यम से एक जून 2003 से प्रभावी हुआ। वित्त (संख्या 2) अधिनियम, 2024 ने अधिनियम की धारा 230 (1ए) में केवल संशोधन किया है, जिसके द्वारा उक्त धारा में काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 ('काला धन अधिनियम') का संदर्भ जोड़ा गया है। यह संशोधन आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 230 (1ए) के प्रयोजन के लिए आयकर अधिनियम, 1961 और प्रत्यक्ष करों से संबंधित अन्य अधिनियमों के तहत देयताओं के समान ही काला धन अधिनियम के तहत देयताओं को भी शामिल करने के लिए किया गया है।
उक्त संशोधन के संबंध में गलत व्याख्या के कारण भ्रामक जानकारी फैल रही है। यह गलत सूचना दी जा रही है कि सभी भारतीय नागरिकों को देश छोड़ने से पहले आयकर मंजूरी प्रमाण पत्र (आईटीसीसी) प्राप्त करना अनिवार्य है। यह तथ्यात्मक रूप से गलत है।
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