हरिद्वार , जून 09 -- उत्तराखंड के हरिद्वार में आगामी कुंभ मेला-2027 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं आपदा-सहिष्णु बनाने के लिए मंगलवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), मेला प्रशासन, उत्तराखंड पुलिस तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में संभावित आपदा जोखिमों, भीड़ प्रबंधन, निकासी योजना, सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को लेकर विस्तृत मंथन किया गया।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मेलाधिकारी सोनिका ने कहा कि कुंभ मेला-2027 की तैयारियों में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक सेक्टर में आपदा प्रबंधन संसाधनों की उपलब्धता, आपातकालीन निकासी मार्गों के विकास, संवेदनशील स्थलों की पहचान तथा संचार तंत्र को मजबूत बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न एजेंसियों की तैयारियों को परखने के लिए समय-समय पर संयुक्त मॉक ड्रिल और अभ्यास भी कराए जाएंगे।

बैठक में बताया गया कि विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल कुंभ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए भगदड़, अग्निकांड, गंगा घाटों पर जल दुर्घटनाएं, प्रतिकूल मौसम, सड़क एवं रेल यातायात पर दबाव, अस्थायी संरचनाओं की सुरक्षा तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को प्रमुख जोखिमों के रूप में चिन्हित किया गया है।

एनडीएमए के सलाहकार (संचालन एवं संचार) कर्नल कीर्ति प्रताप सिंह ने कहा कि कुंभ जैसे विशाल आयोजन में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए बहुस्तरीय तैयारियां आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि एनडीएमए तकनीकी मार्गदर्शन, जोखिम आकलन, प्रशिक्षण, क्षमता विकास तथा मॉक ड्रिल के माध्यम से राज्य सरकार और मेला प्रशासन को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने होटलों, अस्पतालों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थलों का अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराने तथा हरिद्वार रेलवे स्टेशन की आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया।

बैठक में पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, अग्निशमन, स्वास्थ्य एवं रेलवे विभाग की तैयारियों की समीक्षा करते हुए समन्वित रणनीति अपनाने पर सहमति बनी। साथ ही कुंभ मेला शुरू होने से पहले विभिन्न संभावित आपदा परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

भीड़ प्रबंधन को सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली, सीसीटीवी नेटवर्क, ड्रोन सर्विलांस, रियल टाइम मॉनिटरिंग तथा अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के प्रभावी संचालन पर विशेष जोर दिया गया। प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत ट्रैफिक एवं पैदल यात्री प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संवेदनशील क्षेत्रों में जीरो जोन व्यवस्था लागू करने पर भी चर्चा की गई।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (कुंभ मेला) आयुष अग्रवाल ने प्रस्तावित सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन व्यवस्था का प्रस्तुतीकरण करते हुए बताया कि प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान सेक्टर आधारित प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी। वहीं निकासी योजना को सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में आपातकालीन निकासी मार्गों को चिह्नित कर उनका परीक्षण करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा कुंभ मेला-2027 के लिए पृथक घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (आईआरएस) गठित कर विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियां तय करने और सेक्टर कमांडरों की नियुक्ति पर भी सहमति बनी।

मेला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज वर्मा ने बताया कि कुंभ क्षेत्र में 71 स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से 3,456 बेड उपलब्ध रहेंगे तथा 343 चिकित्साधिकारी और 481 पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती की जाएगी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत ने बताया कि मेले के दौरान 200 प्रशिक्षित 'आपदा मित्र' सेवाएं देंगे और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त स्वयंसेवकों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।

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