हरिद्वार , अगस्त, 31 -- आगामी कुंभ में उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार और तीर्थनगरी ऋषिकेश पहुंचने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों का स्वागत इस बार 'वेलकम' के बजाय 'स्वागतम्' से किए जाने की तैयारी है। उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने और देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूत करने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है।
उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् की ओर से कुंभ से पहले 100 से अधिक लोगों को संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है। प्रशिक्षण के लिए ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका प्रतिदिन देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से सीधा संपर्क रहता है। इसमें हरिद्वार रेलवे स्टेशन के कुली, ऑटो और टैक्सी चालक, बस कंडक्टर तथा अन्य सार्वजनिक सेवा से जुड़े लोगों को शामिल किया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को दैनिक व्यवहार में प्रयोग होने वाले संस्कृत के सरल शब्दों और वाक्यों के साथ अभिवादन, रास्ता बताने, हालचाल पूछने तथा यात्रियों को आवश्यक जानकारी देने का तरीका सिखाया जाएगा। उद्देश्य यह है कि कुंभ के दौरान हरिद्वार और ऋषिकेश आने वाले श्रद्धालुओं को सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े लोगों के माध्यम से संस्कृत भाषा का सहज अनुभव मिल सके।
सोमवार को जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि कुंभ जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के धार्मिक आयोजन में संस्कृत के व्यवहारिक प्रयोग से न केवल भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान भी देश-दुनिया तक पहुंचेगी। योजना के तहत संस्कृत को केवल विद्यालयों और धार्मिक आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय आम बोलचाल और जनसेवा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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