होशियारपुर , सितंबर 14 -- विभिन्न किसान और खेत मजदूर संगठनों ने लंबित मांगों को लेकर सोमवार को पंजाब के कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह के कार्यालय के बाहर पांच दिवसीय धरना शुरू किया। संगठनों ने चेतावनी दी कि सरकार ने मांगों पर बातचीत नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

किसान मजदूर मोर्चा पंजाब के बैनर तले आयोजित धरने में भारतीय किसान यूनियन (दोआबा), किसान मजदूर संघर्ष कमेटी (पिड्डी गुट) और किसान मजदूर हितकारी सभा पंजाब के कार्यकर्ता शामिल हुए। धरने का नेतृत्व बीकेयू दोआबा के प्रदेश अध्यक्ष मनजीत सिंह राय ने किया।

श्री राय ने कहा कि किसान संगठनों ने पहले ही पंजाब के सभी उपायुक्तों को मांगों संबंधी ज्ञापन सौंपे हैं और अब मंत्रियों के कार्यालयों तथा आवासों के बाहर पांच दिवसीय धरने देकर सरकार से बातचीत की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि 16 सितंबर को धरने के दौरान बैठक कर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बातचीत नहीं की तो संगठन रेलवे पटरियां और राजमार्ग जाम करने जैसे बड़े आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आम जनता को होने वाली परेशानी के लिए सरकार जिम्मेदार होगी।

उन्होंने फसलों की सिंचाई के महत्वपूर्ण समय में अघोषित बिजली कटौती का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली संकट के कारण किसानों के ट्यूबवेल प्रभावित हो रहे हैं और इसका असर उद्योग पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कोयले की कमी को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

प्रदर्शनकारियों ने बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद सुनिश्चित करने, किसानों और खेत मजदूरों के पूर्ण कर्जमाफी तथा आत्महत्या करने वाले किसानों-मजदूरों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की।

संगठनों के 12 सूत्री मांगपत्र में बाढ़, भूजल के गिरते स्तर और वायु एवं जल प्रदूषण से निपटने के लिए प्रभावी नीति, नदियों के पानी के बंटवारे में राइपेरियन सिद्धांत लागू करने तथा प्रीपेड बिजली मीटर लगाने पर तत्काल रोक की मांग भी शामिल है। उन्होंने पंजाब विधानसभा में बीज अधिनियम-2025, सहकारी अधिनियम-2026, वीबी-जी राम जी अधिनियम और विद्युत संशोधन विधेयक-2025 के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की मांग की। इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ प्रस्ताव, शंभू और खनौरी धरना स्थलों से कथित तौर पर जब्त वाहनों और अन्य सामान की वापसी तथा किसानों-मजदूरों को उनकी खेती की जमीन पर मालिकाना हक देने की मांग की गई।

प्रदर्शनकारियों ने किसान-मजदूर आंदोलनों के दौरान पुलिस और रेलवे द्वारा दर्ज मामलों, पराली जलाने से जुड़े मामलों को वापस लेने, आंदोलनों में जान गंवाने वालों के परिवारों को मुआवजा व सरकारी नौकरी देने तथा भूमि पूलिंग नीति वापस लेने की मांग की। उन्होंने भारतमाला परियोजनाओं के लिए किसानों की जमीन के जबरन अधिग्रहण पर रोक लगाने की भी मांग की।

इसके अलावा नशे पर प्रभावी रोक, युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार, ग्रामीणों की सहमति के बिना निजी संस्थाओं द्वारा ड्रोन से गांवों की मैपिंग रोकने तथा किसानों, व्यापारियों और उद्योग को नए बाजार उपलब्ध कराने के लिए पाकिस्तान के साथ व्यापार गलियारा खोलने की मांग उठाई गई।

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