कपूरथला , मार्च 03 -- पंजाब में कपूरथला जिले के मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. बलकार सिंह ने मंगलवार को सरसों और गेहूं की फसल का निरीक्षण किया और बताया कि ये फसलें अब तक बीमारियों से बची रही है, लेकिन तापमान बढ़ने के साथ इन पर तेले (एफिड) की दस्तक हो सकती है।

डॉ सिंह ने कहा कि यह रस चूसने वाला कीट पत्तों और दानों में से रस चूस लेता है, जिससे दाने कमजोर और सिकुड़े हुए रह जाते हैं। यह कीट खेत के बाहरी किनारों से हमला शुरू करता है। पेड़ों की छाया और बादलों वाले मौसम में इसका हमला तेज हो जाता है। गेहूं और सरसों में हमला करने वाला तेला अलग-अलग होता है, लेकिन सरसों के पास वाले गेहूं के खेतों में इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है।

बचाव और प्रबंधन के उपाय की जानकारी देते हुए डॉ. सिंह ने किसानों को सलाह दी कि गेहूं की फसल का लगातार निरीक्षण करते रहें। यदि गेहूं के एक सिट्टे पर तेले की संख्या पांच से अधिक हो जाए, तो 20 ग्राम थियामथोक्सम प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें। उन्होंने कहा कि स्प्रे हमेशा दोपहर के समय करें ताकि मधुमक्खियों को कम से कम नुकसान हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान में गेहूं पर किसी अन्य बीमारी की आशंका नहीं है, इसलिए किसी अन्य फफूंदनाशक की जरूरत नहीं है।

मुख्य कृषि अधिकारी ने बताया कि सरसों की फसल पर जब 40-50 प्रतिशत से अधिक पौधों पर तेला दिखाई दे या मुख्य शाखा के शीर्ष पर 50-60 तेले नजर आएं, तो 40 ग्राम थियामथोक्सम प्रति एकड़, या 400 मिलीलीटर डायमिथोएट प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें।

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