नयी दिल्ली , जनवरी 25 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में किसानों को देश का मेरूदंड बताया है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि किसानों के परिश्रम ने ही भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे देश आज कृषि उत्पादों का निर्यात करने में सक्षम हैं। उन्होंने जोर दिया कि सरकार का लक्ष्य किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाना, रियायती ब्याज पर कर्ज, प्रभावी बीमा सुरक्षा और अच्छे बीज उपलब्ध कराना है। किसानों को सिंचाई की सुविधाएं मिलें, अधिक उत्पादन के लिए उर्वरक उपलब्ध हों, उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ा जाए तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे सभी विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि 'पीएम किसान सम्मान निधि' के माध्यम से अन्नदाताओं के योगदान को न केवल आदर दिया जा रहा है, बल्कि उनके प्रयासों को संबल भी प्रदान किया जा रहा है।

उन्होंने अपने संबोधन में देश के समावेशी विकास का खाका खींचते हुए आदिवासी, और गरीब वर्ग के कल्याण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि समावेशी सोच के साथ आज समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए अनेक योजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है।

राष्ट्रपति ने जनजातीय समुदाय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले वर्ष 15 नवंबर को देश ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर पांचवां 'जनजातीय गौरव दिवस' उत्साहपूर्वक मनाया। उन्होंने विशेष रूप से 'आदि कर्मयोगी' अभियान का उल्लेख किया, जिसने जनजातीय युवाओं में नेतृत्व क्षमता को निखारा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि 'राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन' के तहत अब तक छह करोड़ से अधिक स्क्रीनिंग की जा चुकी है।

राष्ट्रपति मुर्म ने कहा कि एकलव्य मॉडल रेजीडेंशियल स्कूलों में लगभग 1.40 लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार संग्रहालयों के निर्माण के जरिए जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित कर रही है, जबकि 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' और 'पीएम-जनमन योजना' से सभी जनजातीय समुदायों का सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि दशकों से संघर्ष कर रहे करोड़ों देशवासियों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया गया है और अब प्रयास यह है कि वे पुनः इसकी चपेट में न आएं। 'पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना' को विश्व की सबसे बड़ी योजना बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य 140 करोड़ की आबादी में किसी को भी भूखा न रहने देना है, जिससे 81 करोड़ लाभार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।

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