हमीरपुर , अप्रैल 26 -- उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सरकारी गेहूं खरीद अभियान में बड़ी बाधा बनता नजर आ रहा है। जिले के करीब 80 प्रतिशत किसानों के केसीसी बने होने के कारण क्रय केंद्रों से मिलने वाला भुगतान सीधे ऋण समायोजन में चला जाता है, जिससे किसान सरकारी केंद्रों के बजाय खुले बाजार में गेहूं बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह स्थिति शासन के लिए चिंता का विषय बन गई है। उप संभागीय विपणन अधिकारी (डिप्टी आरएमओ) घनश्याम वर्मा ने रविवार को बताया कि जिले में पहले शासन ने 31 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसे शनिवार को बढ़ाकर 75 हजार मीट्रिक टन कर दिया गया है। इससे खरीद की चुनौती और बढ़ गई है।
उन्होंने बताया कि जिले में अब तक केवल नौ हजार मीट्रिक टन सरकारी गेहूं की खरीद हो सकी है, जो कुल लक्ष्य का 12 प्रतिशत से भी कम है। पिछले वर्ष केवल 23 हजार 155 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी, जो लक्ष्य से काफी कम रही थी। दो वर्ष पहले तो केवल 20 प्रतिशत ही खरीद हो सकी थी।
श्री वर्मा ने कहा कि किसानों को गेहूं क्रय केंद्रों पर बेचने के लिए लगातार प्रेरित किया जाता है, लेकिन अधिकांश किसान मंडियों में आढ़तियों को गेहूं बेचना पसंद करते हैं, क्योंकि वहां उन्हें तत्काल नकद भुगतान मिल जाता है। जबकि सरकारी केंद्रों पर मंडी से अधिक समर्थन मूल्य दिया जाता है और किसानों की सुविधा के लिए नजदीकी क्रय केंद्र भी खोले गए हैं।
उन्होंने बताया कि गेहूं खरीद 15 जून तक जारी रहेगी। अब तक केवल 1239 किसानों ने सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचा है, जिनमें से 633 किसानों का भुगतान भी किया जा चुका है। इसके बावजूद लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है।
उप कृषि निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि जिले में करीब डेढ़ लाख किसान हैं, जिनमें से एक लाख 10 हजार किसानों के केसीसी बने हुए हैं। किसान जिस खाते की जानकारी गेहूं बिक्री भुगतान के लिए देते हैं, वही खाता केसीसी से जुड़ा होता है, जिससे भुगतान सीधे ऋण समायोजन में चला जाता है।
इंडियन बैंक के एलडीएम संगम लाल मिश्रा ने बताया कि केसीसी बनाते समय किसानों से लिखित सहमति ली जाती है कि फसल बिक्री से प्राप्त धनराशि से केसीसी ऋण का भुगतान किया जाएगा। इसी कारण खाते में पैसा आते ही वह ऋण में समायोजित हो जाता है।
उन्होंने कहा कि केवल 10 प्रतिशत किसानों का केसीसी भुगतान नियमित है, जबकि अधिकांश किसान डिफॉल्टर हैं और बैंकों का अरबों रुपये का ऋण फंसा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के बीच कुछ लोग यह अफवाह फैला रहे हैं कि केसीसी कर्ज माफ होने वाला है, जिससे कई किसान भ्रमित हो जाते हैं, जबकि ऐसी कोई योजना नहीं है।
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