नयी दिल्ली , दिसंबर 09 -- नीति आयोग के सदस्य और कृषि अर्थशास्त्री प्रो. रमेश चंद ने किसानों को 'आत्मनिर्भर' बनने के लिए उनसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के दायरे से बाहर वाली फसलों को उपजाने का आह्वान किया है।

उन्होंने मंगलवार को यहां आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि यह नजरिया 'आत्मनिर्भर भारत' में किसानों को 'आत्मनिर्भर' बनने के लिए जरुरी है। प्रो. चंद ने कहा, "कृषि क्षेत्र के विकास में सरकार की निश्चित रूप से एक भूमिका है, लेकिन क्या किसान अपनी ओर से ऐसे कदम उठा सकते हैं जिनके लिए वे वर्तमान में सरकार पर निर्भर हैं? तभी किसान वास्तव में आत्मनिर्भर बनेंगे।" बीते एक दशक में, एमएसपी वाली फसलों की वृद्धि दर 1.8 प्रतिशत रही है, जबकि जिन फसलों पर एमएसपी नहीं है उनकी वृद्धि दर लगभग चार फीसदी की रही है।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में कृषि विकास औसतन 4.6 प्रतिशत रहा है, लेकिन घरेलू मांग केवल लगभग दो प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में, जो अनाज शेष बचेगा (अधिशेष उत्पादन) उसका क्या किया जाना चाहिए? नीति आयोग सदस्य ने कहा कि देश में मजबूत क्रय शक्ति वाला धनाढ्य वर्ग बढ़ रहा है, और किसान इस मांग को पूरा करने वाली फसलों की खेती करके काफी अधिक कमाई कर सकते हैं। इसके लिए वैल्यू चेन को विकसित करने की आवश्यकता होगी।

इस अवसर पर ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (टीएएएस) के अध्यक्ष और आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक आर एस परोडा ने छोटे किसानों पर केंद्रित नीतियों और शोध की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि किसानों को भी आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए विकल्प तलाशने होंगे।

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