अमरोहा , मई 28 -- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और किसान आंदोलनों के अग्रणी नेता विजय सिंह पथिक की पुण्यतिथि पर उन्हे श्रद्धाजंलि अर्पित की गयी। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि सच्चा क्रांतिकारी वही होता है जो समाज के हाशिए पर खड़े व्यक्ति की आवाज बने। विजय सिंह पथिक भारतीय स्वाधीनता संग्राम के ऐसे महानायक थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन और सामंती अत्याचारों के खिलाफ किसानों को संगठित कर संघर्ष की नई दिशा दी। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के गुठावली गांव में जन्मे भूप सिंह ने बाद में अपना नाम बदलकर विजय सिंह पथिक रखा और राजस्थान को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने क्रांतिकारी नेता रासबिहारी बोस और सचिंद्रनाथ सान्याल के साथ मिलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ योजनाएं बनाई थीं। बाद में उन्होंने अहिंसक किसान आंदोलनों के माध्यम से किसानों के अधिकारों की लड़ाई को नई पहचान दी।
पथिक के नेतृत्व में वर्ष 1916 में शुरू हुआ बिजोलिया किसान आंदोलन भारतीय किसान आंदोलनों के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है। उन्होंने राजस्थान सेवा संघ के माध्यम से किसानों को जागरूक किया और लगान, बेगार, चंवरी कर तथा तलवार बंधाई जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ संघर्ष छेड़ा। उनके नेतृत्व और संगठन क्षमता की सराहना महात्मा गांधी ने भी की थी और उन्हें "असली सत्याग्रही" कहा था।
विजय सिंह पथिक एक प्रखर पत्रकार और साहित्यकार भी थे। उन्होंने 'नवीन राजस्थान' और 'राजस्थान केसरी' जैसे समाचार पत्रों का संपादन किया। गणेश शंकर विद्यार्थी के 'प्रताप' समाचार पत्र के माध्यम से उन्होंने बिजोलिया आंदोलन की गूंज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाई। उनके लेख और कविताएं युवाओं में राष्ट्रप्रेम और संघर्ष की भावना जगाने वाली थीं।
उन्होंने सामाजिक सुधारों, शिक्षा के प्रसार और महिलाओं की स्थिति सुधारने पर भी विशेष बल दिया। अजमेर को केंद्र बनाकर उन्होंने राजस्थान के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में व्यापक बदलाव लाने का प्रयास किया। वक्ताओं ने कहा कि विजय सिंह पथिक ने कभी पद या सम्मान की इच्छा नहीं की और सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए किसानों और शोषित वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उनकी पुण्यतिथि पर लोगों ने उनके योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
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