रांची , अक्टूबर 26 -- झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार किसानों के आर्थिक सशक्तीकरण और उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण पहल कर रही है।

इसी कड़ी में खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के दौरान धान अधिप्राप्ति पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अतिरिक्त मिलने वाले राज्य सरकार के बोनस को Rs.84 से बढ़ाकर Rs.109 प्रति क्विंटल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की पहल से किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ पहुंचाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

राज्य सरकार ने इस बार 40 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए राज्य के सभी 24 जिलों में जिला-वार धान अधिप्राप्ति की योजना तैयार की गई है। सरकार का उद्देश्य किसानों को सरकारी खरीद व्यवस्था से जोड़ना, उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।

खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य Rs.2,441 प्रति क्विंटल और ग्रेड 'ए' धान का Rs.2,461 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार की ओर से Rs.109 प्रति क्विंटल बोनस देने का प्रस्ताव है।

इस प्रस्ताव के अनुसार सामान्य धान पर कुल Rs.2,550 प्रति क्विंटल और ग्रेड 'ए' धान पर Rs.2,570 प्रति क्विंटल की दर बनती है। पिछले वर्ष की तुलना में बोनस को Rs.84 से बढ़ाकर Rs.109 प्रति क्विंटल करने की पहल से किसानों को प्रति क्विंटल Rs.25 का अतिरिक्त लाभ मिल सकेगा।

40 लाख क्विंटल धान खरीद के निर्धारित लक्ष्य के अनुसार Rs.109 प्रति क्विंटल बोनस भुगतान के लिए Rs.43 करोड़ 60 लाख रुपये की संभावित राशि का आकलन किया गया है। इस राशि की स्वीकृति के लिए योजना प्राधिकृत समिति के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है।

विभागीय आकलन के अनुसार, केंद्र सरकार के एनएफएसए सेंट्रल पूल के लिए 19.60 लाख क्विंटल तथा झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के लिए 19,79,412 क्विंटल धान की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है। इस प्रकार कुल आवश्यकता 39,39,412 क्विंटल बैठती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लक्ष्य को राउंड ऑफ कर 40 लाख क्विंटल निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

विभाग ने राज्य के सभी 24 जिलों के लिए धान खरीद की जिला-वार योजना भी तैयार की है। इसमें बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, दुमका, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, गुमला, हजारीबाग, जामताड़ा, खूंटी, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, पाकुड़, पलामू, रामगढ़, रांची, साहिबगंज, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम शामिल हैं।

धान अधिप्राप्ति के लिए झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के माध्यम से व्यवस्था की जाएगी। इससे किसानों की उपज की सरकारी खरीद के साथ-साथ राज्य की खाद्य सुरक्षा योजनाओं के लिए आवश्यक धान की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

मंत्री डॉ. अंसारी ने कहा कि झारखंड सरकार किसानों के हितों और उनके आर्थिक सशक्तीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। लोकप्रिय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में सरकार ऐसे निर्णय लेने के लिए प्रयासरत है, जिनसे राज्य के गरीबों, किसानों और मेहनतकश लोगों को सीधा लाभ मिल सके।

उन्होंने कहा, "हमारी सरकार गरीबों और किसानों की सरकार है। हम किसानों की समस्याओं और उनके दर्द को समझते हैं। किसान हमारे समाज की रीढ़ हैं। किसान मजबूत होंगे, तभी हमारा समाज और राज्य मजबूत होगा। अन्नदाताओं को उनकी मेहनत का उचित मूल्य और सम्मान मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ धान बोनस को Rs.84 से बढ़ाकर Rs.109 प्रति क्विंटल करने की पहल की गई है।"मंत्री डॉ अंसारी ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना, उनकी आय बढ़ाने में सहयोग करना और खेती-किसानी को अधिक लाभकारी बनाना सरकार की प्राथमिकता है। कृषि क्षेत्र मजबूत होगा, तो गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी और किसानों के परिवारों का भविष्य बेहतर बनेगा।

डॉ. अंसारी ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास की मजबूत नींव हैं। उनकी मेहनत से खेतों में अनाज पैदा होता है और पूरे समाज का जीवन चलता है। इसलिए किसानों के हितों की रक्षा करना, उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना सरकार की जिम्मेदारी है।

40 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य, सभी 24 जिलों में अधिप्राप्ति की तैयारी और बोनस बढ़ाने का प्रस्ताव राज्य के किसानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। सरकार का प्रयास है कि किसानों को सरकारी व्यवस्था का लाभ मिले, उनकी मेहनत का सम्मान हो और झारखंड कृषि के क्षेत्र में नई मजबूती हासिल करे।

इस अवसर पर विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि पूर्व में किसानों को धान की में काफी लाभ मिला, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जीविभागीय मंत्री जी का निर्देश है कि धान कटनी से पहले इन चीजों का होमवर्क बढ़िया से कर लिया जाए जिसको लेकर मंत्री इरफान अंसारी जी काफी गंभीर हैं लगातार फॉलो कर रहे हैं मिटिंग कर रहे हैं , लगातार विभागीय के समीक्षा के बाद इसका परिणाम है कि हम लोगों ने यह निर्णय लिया है। अब जल्द हम लोग कैबिनेट भेजकर इसके अनुमति ले लेंगे।

किसानों की मुस्कान, अन्नदाताओं का सम्मान और गांवों की खुशहाली-यही हेमंत सोरेन सरकार की प्राथमिकता है।

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