जम्मू , जनवरी 19 -- जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकवादियों के खिलाफ चलाये जा रहे तलाश अभियान के दौरान घायल हुए विशेष सैन्य बल का एक जवान सोमवार को शहीद हो गया।
व्हाइट नाइट कोर ने एक्स पर कहा, "जीओसी, व्हाइट नाइट कोर और सभी रैंक विशेष बलों के हवलदार गजेंद्र सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने 19 जनवरी, 2026 की रात को चल रहे ऑपरेशन त्राशी-1 के दौरान सिंगपुरा इलाके में एक आतंकवाद विरोधी अभियान को बहादुरी से अंजाम देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।"पोस्ट में कहा गया, "हम उनके अदम्य साहस, वीरता और कर्तव्य के प्रति निस्वार्थ समर्पण का सम्मान करते हैं और दुख की इस घड़ी में शोक संतप्त परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं।"आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मुठभेड़ रविवार को उस समय शुरू हुई जब सेना और पुलिस की एक संयुक्त टीम ने आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सोनार गांव के पहाड़ी इलाके में तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान घात लगाकर बैठे आतंकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग और हैंड ग्रेनेड से सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया, जिसमें आठ सैन्यकर्मी घायल हो गये। घायलों को तुरंत हेलीकॉप्टर से अस्पताल ले जाया गया, हालांकि सोमवार सुबह पैरा जवान हवलदार गजेंद्र सिंह ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
इस बीच, सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम ने सोमवार सुबह जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के सिंहपोरा के जंगलों में छिपे आतंकवादियों का पता लगाने के लिए एक बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया। सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कई टीमें इलाके में तलाशी अभियान में लगी हुई हैं, साथ ही ड्रोन, आधुनिक निगरानी उपकरण और खोजी कुत्तों की मदद भी ली जा रही है ताकि किसी भी दिशा से भागने की कोशिश को नाकाम किया जा सके। घने जंगल, खड़ी चोटियाँ और खराब मौसम तलाशी अभियान में बाधा डाल रहे हैं, हालांकि, सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को कड़ी घेराबंदी में डाल दिया है।
इस इलाके में रविवार को पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के दो से तीन आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच भीषण गोलीबारी हुई। सेना, पुलिस और विशेष अभियान समूह की एक टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया। आतंकवादियों ने तलाशी दल पर गोलीबारी की, जिसका जवाब दिया गया। आठ सैनिक मुख्य रूप से आतंकवादियों द्वारा अचानक ग्रेनेड हमले से हुए छर्रों के कारण घायल हो गए।
सूत्रों के अनुसार, इलाके में दो-तीन आतंकवादियों का एक समूह फंसा हुआ है जो संभवतः जैश से संबंधित है। ऑपरेशन त्राशी-1' अंधेरा होने के कारण रविवार शाम को रोक दिया गया था, लेकिन सोमवार सुबह उजाले के साथ ही इसे फिर से शुरू कर दिया गया।
सेना के अनुसार, घेराबंदी को और मजबूत करने और आतंकवादियों को किसी भी परिस्थिति में भागने से रोकने के लिए इलाके में अतिरिक्त सैनिक भेजे गए हैं। एक अधिकारी ने कहा, " मुश्किल भौगोलिक स्थिति और घने जंगलों के बावजूद, कर्मी अत्यंत पेशेवर तरीके से अभियानों में लगे हुए हैं। दुश्मन की गोलीबारी में घायल होने के बावजूद, सेना का मनोबल कम नहीं हुआ है।"उन्होंने कहा, "तलाशी अभियान सुबह जल्दी फिर से शुरू किया गया, जिसमें ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद ली गयी।" उन्होंने कहा कि इलाके की घेराबंदी कर दी गयी है।
जम्मू क्षेत्र में इस साल की यह तीसरी बड़ी मुठभेड़ है। इससे पहले, सात और 13 जनवरी को कठुआ के कहोग और नजोत जंगलों में दो अलग-अलग मुठभेड़ें हुईं, जिनमें कई आतंकवादी मारे गये। पिछले साल दिसंबर में उधमपुर के मजालता इलाके में एक मुठभेड़ के दौरान एक पुलिस अधिकारी भी शहीद हो गया था, जबकि आतंकवादी मौके से भागने में सफल रहे थे।
इस बीच गणतंत्र दिवस के मद्देनजर क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी घुसपैठ के जरिए और अधिक आतंकवादियों को भेजने की कोशिश कर रहे हैं। इसी संदर्भ में, सेना और पुलिस ने किसी भी संभावित खतरे को शुरू में ही नाकाम करने के लिए वन क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया है।
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