नयी दिल्ली , जून 17 -- शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसद की स्थायी समिति ने देश के विभिन्न राज्यों में किशोरियों को कौशल सिखाने के लिए चलाये जा रहे विशेष पायलट प्रोजेक्ट में प्रशिक्षण की धीमी गति पर टिप्पणी करते हुए इस कार्यक्रम में आने वाली हर रुकावट को दूर करने की सिफारिश की है।
राज्य सभा सदस्य दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली इस समिति ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की अनुदान मांगों 2025-26 से संबंधित 365वें प्रतिवेदन में अंतर्विष्ट समिति की सिफारिशों और टिप्पणियों पर सरकार द्वारा की गयी कार्रवाई के संबंध में अपने 379वें प्रतिवेदन में मंत्रालय के हवाले से उल्लेख किया है कि गत वर्ष 13 अक्टूबर तक कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ( एमएसडीई) के साथ मिलकर किशोरियों को कौशल सिखाने के लिए चलाए जा रहे विशेष पायलट प्रोजेक्ट के तहत, 19 राज्यों के 27 ज़िलों में 6,263 किशोरियों को जोड़ा गया था। इनमें 368 किशोरियों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है और 468 की ट्रेनिंग अभी चल रही है।
समिति ने पायलट प्रोग्राम के लिए मंत्रालय के शुरुआती प्रयासों की सराहना की है, पर साथ में टिप्पणी की है, " अब तक जिन लड़कियों ने असल में अपनी ट्रेनिंग पूरी की है, उनकी संख्या, कुल जोड़ी गई लड़कियों (यानी 6263) की तुलना में काफ़ी कम है।"समिति ने मंत्रालय से इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर बारीकी से नज़र रखने, प्रशिक्षण देने में आने वाली किसी भी रुकावट को दूर करने, और यह सुनिश्चित करने की सिफारिश की है कि बाकी बची हुई किशोरियों का भी जल्द से जल्द नामांकन कर उनका भी प्रशिक्षण पूरा किया जाये।
राज्य सभा के सभापति को यहां मंगलवार को सौंपी गयी इस रिपोर्ट में समिति ने अपनी पिछली सिफ़ारिश को भी दोहराया है कि मंत्रालय को इस कार्यक्रम का विस्तार सभी ज़िलों तक करने के लिए एक चरणबद्ध रूपरेखा तैयार करनी चाहिए, और इसके लिए पर्याप्त और लगातार वित्तीय आवंटन भी सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि कौशल सिखाने और दोबारा कौशल सिखाने के लाभ देश भर की किशोरियों तक समय पर और प्रभावी ढंग से पहुंच सकें।
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