चंडीगढ़ , सितंबर 17 -- शिरोमणि अकाली दल (शिअद) पुनर्जीवित के अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना और ऊपरी यमुना की नई जल व्यवस्था में पंजाब को शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से 1994 के ऊपरी यमुना समझौते की 2025 के बाद प्रस्तावित समीक्षा की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

श्री सिंह ने गुरुवार को कहा कि 15 सितंबर को किशाऊ परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच समझौता हुआ है, जबकि पंजाब इसमें शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि टौंस नदी पर प्रस्तावित इस परियोजना में करीब 1,56.2 करोड़ घन मीटर जल भंडारण की क्षमता होगी और सिंचाई, पेयजल तथा बिजली उत्पादन से जुड़े लाभ संबंधित राज्यों को मिलने हैं। उन्होंने 1994 के ऊपरी यमुना समझौते का हवाला देते हुए कहा कि इसमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के लिए जल हिस्सेदारी निर्धारित की गई थी तथा समझौते में 2025 के बाद समीक्षा का प्रावधान भी बताया गया है। उन्होंने केंद्र से पूछा कि 2026 में इस प्रावधान के तहत समीक्षा की गई है या नहीं और यदि नहीं, तो इसका कारण क्या है।

उन्होंने कहा कि पंजाब किसी राज्य के मौजूदा कानूनी अधिकारों को चुनौती देने की मांग नहीं कर रहा, लेकिन नए जल भंडारण परियोजनाओं और भविष्य की जल व्यवस्था पर पंजाब को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब 1994 की व्यवस्था में हिमाचल प्रदेश को सह-बेसिन राज्य के रूप में शामिल किया जा सकता है, तो पंजाब को ऊपरी यमुना से जुड़े नए परियोजनाओं पर चर्चा से बाहर रखने का आधार क्या है।

श्री सिंह ने केंद्र से ऊपरी यमुना जल व्यवस्था की समीक्षा प्रक्रिया सार्वजनिक करने तथा पंजाब के प्रतिनिधियों को इसमें शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अंतरराज्यीय नदी जल मामलों में मानदंड समान, पारदर्शी और न्यायसंगत होने चाहिए।

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