पटना , नवंबर 01 -- बिहार में 11 नवंबर को दूसरे चरण के 122 सीटों पर होने वाले चुनाव में किशनगंज जिले की चार विघानसभा सीटों में से तीन विधायकों को बेटिकट कर दिया गया है।

किशनगंज जिले की सभी चार सीटें किशनगंज, ठाकुरगंज,बहादुरगंज और कोचाधामन में महागठबंधन का कब्जा है। ठाकुरगंज,बहादुरगंज और कोचाधामन में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और किशनगंज में कांग्रेस का कब्जा है।

किशनगंज विधानसभा सीट से कांग्रेस ने विधायक इजहारूल हुसैन को बेटिकट कर दिया।कांग्रेस ने यहां पूर्व विधायक कमहरूल होदा को चुनावी अखाड़े में उतारा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यहां पूर्व विधायक सिकंदर सिंह की पत्नी स्वीटी सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वर्ष 2020 के चुनाव में कांग्रेसप्रत्याशी इजहारूल हुसैन ने भाजपा उम्मीदवार स्वीटी सिंह को पराजित किया था।असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) उम्मीदवार कमरूल होदा तीसरे नंबर पर रहे थे। इस बार के चुनाव में एआईएमआईएम ने यहां शम्श आगाज को प्रत्याशी बनाया है, जो मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में लगे हुये हैं। इस विधानसभा क्षेत्र से इन तीनों के बीच मुकाबला होने की संभावना बन रही है। हालांकि, एआइएमआइएम से बागी हुए इसहाक आलम जनसुराज चुनाव लड़ रहे हैं, जो मुकाबले को चतुष्कोणीय बनाने मे लगे हुये हैं।इस सीट पर 10 उम्मीदवार रण क्षेत्र में डटे हुये हैं।

बहादुरगंज सीट से राजद ने विधायक मोहम्मद अंजार नैयामी को बेटिकट कर दिया है। महागठबंधन में सीटों के तालमेल के तहत यह सीट कांग्रेस को मिली है।कांग्रेस ने यहां प्रोफेसर मुसव्विर आलम को प्रत्याशी बनाया है।लोक जनशक्ति पार्टी पार्टी (रामविलास) के टिकट पर मोहम्मद कलीमउद्दीन अपना जोर दिखाने की कोशिश में हैं, वहीं एआईएमआईएम प्रत्याशी तौसीफ आलम चुनावी अखाड़े में हुंकार भर रहे हैं। वर्ष 2020 में एआईएमआईएम प्रत्याशी मोहम्मद अंजार नैयामी ने विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) उम्मीदवार लखन लाल पंडित को पराजित किया था। कांग्रेस उम्मीदार मोहम्मद तौसीफ आलम तीसरे नंबर पर रहे थे। बाद मे एआईएमआईएम के विधायक मोहम्मद अंजार नैयामी राजद में शामिल हो गये थे।वह इस बार चुनाव लड़ने से वंचित रहे गये।

बहादुरगंज विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रह चुकी है, लेकिन साल 2020 के चुनाव में कांग्रेस, एआईएमआईएम और वीआईपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला था. इस चुनाव में मुस्लिम वोट बटने के कारण कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। तौसीफ आलम ने इस क्षेत्र का चार बार प्रतिनिधित्व किया है। इस सीट पर नौ उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में उतरे हैं।

कोचाधामन सीट से राजद ने विधायक मोहम्मद इजहार आशफी को बेटिकट कर दिया है। राजद ने यहां पूर्व विधायक मुजाहिद आलम को उम्मीदवार बनाया है जबकि भाजपा के टिकट पर वीणा देवी चुनावी अखाड़े में अपना जोर दिखा रही हैं। एआईएमआईएम ने शरवर आलम को उम्मीदवार बनाया है।वर्ष 2020 में एआईएमआईएम प्रत्याशी इजहार आशफी ने जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के उम्मीदवार मुजाहिद आलम को पराजित किया था। राजद उम्मीदवार मोहम्मद शाहिद आलम तीसरे नंबर पर रहे थे।बाद मे एआईएमआईएम के विधायक इजहार असफी राजद में शामिल हो गये। इस बार उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिला है।कोचाधामन सीट का गठन 2008 में हुए परिसीमन के बाद हुआ था और तब से यह एक मुस्लिम-बहुल सीट मानी जाती है। इस सीट पर पहला विधानसभा चुनाव 2010 में हुआ था। वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में राजद के टिकट पर अख्तरुल ईमान ने जीत हासिल की। वर्ष 2014 में अख्तरुल ईमान ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद इस सीट पर उप चुनाव हुए। उप चुनाव में, जदयू के मुजाहिद आलम ने जीत दर्ज की।वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में, जदयू के मुजाहिद आलम ने अपनी जीत बरकरार रखी। उन्होंने एआईएमआईएम के प्रत्याशी अख्तरुल ईमान को हराया। इस सीट पर छह उम्मीदवार चुनावी संग्राम में किस्मत आजमा रहे हैं।

ठाकुरगंज विधानसभा सीट से राजद ने पूर्व सांसद असरारूल हक कासमी के पुत्र और विधायक सउद आलम को चुनावी समर में उतारा है।जदयू ने यहां पूर्व विधायक गोपाल अग्रवाल पर दांव लगाया है। एआईएमआईएम प्रत्याशी गुलाम हसनैन भी यहां जीत के लिये जोर लगा रहे हैं।वर्ष 2020 में राजद के सउद आलम ने निर्दलीय गोपाल अग्रवाल को चुनावी अखाड़े में शिकस्त दी थी। जदयू के मोहम्मद नौशाद आलम तीसरे जबकि एआईएमआईएम प्रत्याशी महबूब अलाम चौधरी चौथे नंबर पर रहे थे। ठाकुरगंज में 10 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।

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