जगदलपुर , फरवरी 27 -- संयुक्त राष्ट्र से संबद्व सलाहकार और हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक किर्सी ह्यवैरिनेन ने शुक्रवार को धुड़मारास का भ्रमण कर ग्रामीणों के साथ संवाद किया यहां के जीवन के श्रेष्ठ अनुभवों को महसूस करते हुए उनसे सीखने की बात कही।
जिला पीआरओ से शुक्रवार मिली जानकारी के अनुसार,ह्यवैरिनेन ने विशेष रूप से धुड़मारास के प्लास्टिक मुक्त जीवन की सराहना की, जो आज पूरे विश्व के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। यही उपलब्धि है कि आज यह गांव विश्व के उन चुनिंदा 20 गांवों के नेटवर्क में शामिल हो चुका है, जो अब एक-दूसरे से जुड़कर बेहतर कार्य करने की प्रेरणा ले रहे हैं।
ह्यवैरिनेन ने अपने दौरे के अंतिम दिन जोर देकर कहा कि धुड़मारास पर्यटन के उन सभी वैश्विक मापदंडों को पूरा करता है जो ग्रामीण विकास की अवधारणा को साकार करते हैं। इस संवाद के दौरान ग्रामीणों ने भी अपने भीतर आए बदलावों को साझा किया। उन्होंने बताया कि पर्यटन की बारीकियों को समझने से पहले वे अनजाने में ही पेड़-पौधों और वन्य पशुओं को क्षति पहुंचाते थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज यहां का हर निवासी अपने पर्यावरण के प्रति न केवल जागरूक है, बल्कि उसके संरक्षण के लिए भी समर्पित है।
यह बदलाव केवल वैचारिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक भी है। पहले जहां जीवन यापन के लिए ग्रामीणों को पलायन करना पड़ता था, वहीं अब पर्यटकों के आने से उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आया है। इसका सीधा उदाहरण गांव की बदलती जीवन शैली में दिखता है। कभी ग्रामीणों के पास साइकिल तक नहीं थी, आज उनके पास अपनी मोटरसाइकिलें हैं। धुड़मारास की इस सफलता को देखते हुए अब अन्य गांवों के लोग भी यहां सीखने के उद्देश्य से आ रहे हैं।
भविष्य की रूपरेखा तय करते हुए ह्यवैरिनेन ने पुनर्वनीकरण पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अब यहां पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की जानकारी रख सकते हैं और गांव में आ रहे सकारात्मक बदलावों का दस्तावेजीकरण कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि धुड़मारास का विकास पूरी तरह से यहां के निवासियों के हाथों में है, इसलिए योजना निर्माण से लेकर उसके क्रियान्वयन तक की जिम्मेदारी ग्रामीणों को ही तय करनी होगी। उन्होंने सलाह दी कि योजनाएं ऐसी हों जो धरातल पर उतर सकें और जिनसे धुड़मारास की वास्तविक छवि ही दुनिया के सामने आए। यहां की सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं की कहानियां तैयार कर लोगों से साझा की जानी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि यहां की जानकारी यहीं के लोग पर्यटकों को दें।
अंत में उन्होंने एक महत्वपूर्ण मंत्र देते हुए कहा कि जैसे एक वृक्ष अपनी जड़ों से बढ़ता है, वैसे ही ग्रामीण धुड़मारास की जड़ हैं। ग्रिंगो ट्रेल फिल्म के ट्रेलर और वैश्विक अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ग्लोबल नेटवर्क का उपयोग पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे पर्यटकों की आवश्यकता है जो इस स्थान और यहां के लोगों की तरह इस मिट्टी का सम्मान करें। धुड़मारास की मौलिकता को बनाए रखते हुए इसे विश्व का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम बनाना अब ग्रामीणों के सामूहिक संकल्प पर निर्भर है।
इस अवसर पर संचालक कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान नवीन कुमार के साथ ही बलौदाबाजार के वन मंडलाधिकारी गणवीर धम्मशील विशेष रूप से उपस्थित थे। इसके साथ ही भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की प्रतिनिधि मंजिरी कमलापुरकर, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की प्रतिनिधि शुभदा चतुर्वेदी सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
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