कोटा , मई 12 -- राजस्थान में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा है किकोटा में स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत एवं स्वास्थ्य बिगड़ने के मामले को लेकर राज्य सरकार बेहद गंभीर है और लगातार सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।
श्रीमती राठौड़ ने मंगलवार को कोटा में कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराई जा रही है और दोषियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी दिशा में अब राज्य सरकार ने दो चिकित्सकों और दो नर्सिंगकर्मियों को और निलंबित कर दिया है और जेके लोन अस्पताल एवं न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
राठौड़ ने सोमवार शाम को कोटा पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली और मंगलवार को भी दिनभर इस घटना के विभिन्न पहलुओं पर समीक्षा की। इसके बाद इलाज एवं पर्यवेक्षणीय लापरवाही सामने आने पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा के आचार्य डॉ. बद्रीलाल और सह आचार्य डॉ. खुशबू मीणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इसके अतिरिक्त जेके लोन अस्पताल की नर्सिंग अधिकारी पिंकी खींची एवं न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की नर्सिंग अधिकारी मीनाक्षी मीणा को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
इस मामले में प्रशासनिक एवं पर्यवेक्षणीय जिम्मेदारी को निभाने में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा एवं न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोटा के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उनके विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले श्रीमती राठौड़ ने अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा करके न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा के प्रधानाचार्य को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर अस्पताल की कार्यप्रणाली, रक्त चढ़ाने, मरीजों के उपचार के रिकॉर्ड आदि पर आगामी दो दिन में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी के निर्देश दिये। साथ ही एसओपी जारी किए जाने के उपरांत उसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के लिए भी पाबंद किया।
उन्होंने कहा कि सभी चिकित्सकों एवं नर्सिंगकर्मियों को एसओपी के अनुसार कार्य करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाए। मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर एवं आपातकालीन इकाइयों में उपचार प्रोटोकॉल की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए।
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