वाराणसी , अक्टूबर 22 -- काशी के ऐतिहासिक एवं विश्वप्रसिद्ध नाटी इमली भरत मिलाप में गुरुवार को हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। चित्रकूट रामलीला समिति की ओर से आयोजित इस पारंपरिक लीला के दौरान पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के मिलन का भावुक दृश्य देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
काशी के प्रमुख लक्खा मेलों में शुमार नाटी इमली का भरत मिलाप देखने के लिए वाराणसी के अलावा आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचे। इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए सुबह से ही लीला स्थल और आसपास के क्षेत्रों में लोगों की भीड़ जुटने लगी थी।
मान्यता है कि गोस्वामी तुलसीदास के समकालीन एवं उनके शिष्य संत मेधा भगत ने इस लीला की शुरुआत की थी। कहा जाता है कि तुलसीदास के निधन के बाद मेघा भगत काफी व्यथित थे। इसी दौरान उन्हें स्वप्न में तुलसीदास के दर्शन हुए और उनकी प्रेरणा से भरत मिलाप की परंपरा शुरू हुई। नाटी इमली में इस आयोजन की परंपरा साढ़े चार सौ वर्ष से अधिक पुरानी मानी जाती है।
रामायण के प्रसंग के अनुसार, लंका में रावण पर विजय प्राप्त करने और 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटते हैं। इसी दौरान भगवान राम का अपने भाइयों भरत और शत्रुघ्न से मिलन होता है। नाटी इमली में इसी प्रसंग का पारंपरिक मंचन किया जाता है।
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