वाराणसी , अप्रैल 22 -- काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय कला मंच द्वारा आयोजित दो दिवसीय "काशी कला कुंभ-2026" का भव्य शुभारंभ पंडित ओंकारनाथ प्रेक्षागृह में हुआ। कला, संस्कृति और भारतीय परंपरा के विविध रंगों से सजा यह आयोजन गुरुवार तक चलेगा, जिसमें देशभर के कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

उद्घाटन सत्र में कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य ने कहा कि ऐसे आयोजनों से कला के विभिन्न आयामों को मंच मिलता है और उनकी गुणवत्ता में निरंतर सुधार होता है। राष्ट्रीय कला मंच के अखिल भारतीय प्रमुख अंकित शुक्ला ने मंच की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से कला के क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। वहीं विशिष्ट अतिथि आनंद श्रीवास्तव ने लोक कलाओं को समाज के पुनर्निर्माण का सशक्त माध्यम बताया।

मुख्य अतिथि सांसद मनोज तिवारी ने काशी से अपने जुड़ाव को साझा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन प्रतिभाओं को निखारने का अवसर देते हैं और भारतीय समाज की जड़ों में कला व संगीत की गहरी उपस्थिति है। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कथावाचक पलक किशोरी, काशी प्रांत प्रचारक रमेश जी तथा ललित कला अकादमी के अध्यक्ष सुनील विश्वकर्मा ने भी कला की सामाजिक उपयोगिता और उसकी निरंतरता पर विचार रखे। इस अवसर पर डॉ. अपराजिता मिश्रा की पुस्तक "वेदकालीन आध्यात्मिक महिलाएं" का विमोचन भी किया गया।

उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में अयोध्या और ग्वालियर घराने के कलाकारों समेत विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिससे पूरा परिसर सुरों और कला की अभिव्यक्तियों से गूंज उठा। आयोजन न केवल कला को मंच दे रहा है, बल्कि युवाओं में सृजनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।

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