चेन्नई , अगस्त 01 -- तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के कर्नाटक दौरे और कावेरी जल विवाद से निपटने के तरीके की आलोचना की है।
श्री स्टालिन ने सोशल मीडिया पर कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों और किसान संगठनों के नेताओं ने मुख्यमंत्री को आगाह किया है कि दशकों पुराने विवाद का बातचीत के जरिए समाधान खोजने के लिए कर्नाटक के साथ बातचीत करना फायदेमंद नहीं होगा और साथ ही उनसे पड़ोसी राज्य का दौरा न करने का आग्रह भी किया है।
उन्होंने कहा कि हमने अतीत से यह सीखा है कि तमिलनाडु को कर्नाटक के साथ केवल कानूनी लड़ाई लड़नी चाहिए, जिसने साफ तौर पर कह दिया था कि वह राज्य को पानी नहीं देगा। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य तमिलनाडु को केवल अतिरिक्त पानी (जो कर्नाटक अपने जलाशयों के लबालब भरने पर छोड़ता है) खपाने के लिए एक 'ड्रेनिंग प्लेस' (पानी बहाने की जगह) के तौर पर देखता है। श्री स्टालिन ने व्यंग्य भरे लहजे में कहा कि मुख्यमंत्री ने विभिन्न दलों और कृषि संगठनों की चेतावनी को नजरंदाज करते हुए कर्नाटक को संकेत भेजे थे और वे सोचते थे कि ऐसा कर वह कावेरी नदी को अपने साथ वापस ला सकते हैं।
लेकिन जब कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्लयूएमए) ने पानी छोड़ने का आदेश दिया, तो कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु के अपने समकक्ष के लिए दरवाजे बंद कर दिए और उनसे कहा कि वे अपने राज्य में बने तनावपूर्ण हालात को देखते हुए बेंगलुरु न आएं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थितियों का पहले से अंदाजा होने के कारण तमिलनाडु में सभी ने उन्हें (प्रस्तावित बातचीत के लिए आगे न बढ़ने की) चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि कम से कम अब श्री विजय को सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत करके तमिलनाडु की जीवनरेखा माने जाने वाले कावेरी मुद्दे को संभालना चाहिए।
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