बेंगलुरु , अगस्त 02 -- कावेरी जल विवाद पर उच्चतम न्यायालय में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) द्वारा याचिका दायर किए जाने से कर्नाटक सरकार के लिए कानूनी व राजनीतिक चुनौती बढ़ गई है।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने रविवार को सरकार को कर्नाटक के किसानों और पीने के पानी के हितों की रक्षा के समर्थन में आंकड़ों पर आधारित एक मजबूत और विस्तृत पक्ष रखने की सलाह दी।
श्री बोम्मई ने कावेरी मुद्दे पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में हाल ही में हुई भारी बारिश से पानी का तत्काल संकट तो कम हुआ है लेकिन सरकार को इसे लेकर निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "अच्छी बारिश प्रकृति की ओर से मिली एक अस्थायी राहत है। यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। सरकार को सभी जरूरी तथ्य और वैज्ञानिक आंकड़े उच्चतम न्यायालय के सामने रखने चाहिए। अगर कर्नाटक अपना पक्ष मजबूती से रखने में नाकाम रहता है, तो कोई प्रतिकूल आदेश राज्य को फिर से मुश्किल स्थिति में डाल सकता है।"श्री बोम्मई ने कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की हर पखवाड़े बैठक और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) द्वारा संकट-साझाकरण फॉर्मूले के तहत हर महीने पानी छोड़े जाने की समीक्षा किए जाने के मद्देनजर कहा कि राज्य को जलाशय में पानी के भंडारण, बारिश, पीने के पानी की जरूरतों और सिंचाई की आवश्यकताओं के बारे में ठोस सबूत शीर्ष अदालत के सामने पेश करने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को हाल की बारिश को संकट का अंत मानने की बजाय कर्नाटक के दीर्घकालिक हितों की रक्षा पर ध्यान देना चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित