बेंगलुरु , अगस्त 02 -- कावेरी विवाद पर रविवार को कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की बुलायी सर्वदलीय बैठक में राज्य के हितों की रक्षा के लिए एक साझी कानूनी रणनीति का सर्वसम्मति से समर्थन किया गया । इसके साथ ही दशकों पुराने नदी जल विवाद के एकमात्र स्थायी समाधान के रूप में लंबे समय से लंबित मेकेदातू संतुलन जलाशय परियोजना को पुनर्जीवित करने पर सहमति बनी।
पार्टी लाइन से ऊपर उठकर पूर्व मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में यह बैठक कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) की कावेरी जल नियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के उस निर्देश को बरकरार रखने के कुछ दिनों बाद हुई, जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों के लिए तमिलनाडु को रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के लिए कहा गया था।
श्री शिवकुमार ने बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कर्नाटक के राजनीतिक दलों ने मतभेदों को दरकिनार कर इस मुद्दे पर मिलकर लड़ने का फैसला किया है।उन्होंने कहा, "हम सभी कावेरी विवाद के साथ ही बड़े हुए हैं। राज्य के किसानों और लोगों के हित राजनीति से अधिक महत्वपूर्ण हैं।" उन्होंने कहा कि जब भी कर्नाटक की भूमि, जल और भाषा दांव पर होती है, राज्य ने हमेशा एकजुटता दिखायी है।
मुख्यमंत्री ने कन्नड़ संगठनों से प्रस्तावित 'कर्नाटक बंद' वापस लेने की अपील करते हुए कहा कि सभी दलों ने सर्वसम्मति से सरकार के रुख का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, "मैं सभी कन्नड़ संगठनों, भाजपा, जेडीएस और अन्य दलों से बंद का आह्वान न करने की अपील करता हूं। यह सर्वदलीय बैठक का सर्वसम्मत निर्णय था।"मेकेदातू संतुलन जलाशय परियोजना को बार-बार होने वाले कावेरी विवादों का राज्य का दीर्घकालिक समाधान बताते हुए श्री शिवकुमार ने आग्रह किया कि बिना किसी और देरी के इस परियोजना को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "यह तमिलनाडु को अधिक या कर्नाटक को कम मिलने के बारे में नहीं है। हमें बिना समय गंवाये मेकेदातू जलाशय का निर्माण करना चाहिए और इस अवसर का उपयोग दोनों राज्यों को सौहार्दपूर्ण और स्थायी समाधान के लिए एक मंच पर लाने के लिए करना चाहिए।"उन्होंने स्पष्ट किया कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में कोई तकनीकी बाधा नहीं है और केवल प्रक्रियात्मक दस्तावेज ही बाकी हैं। उन्होंने दावा किया कि यह परियोजना प्रवाह को नियंत्रित कर अंततः तमिलनाडु को लाभ पहुंचायेगी और दोनों राज्यों के लिए जल सुरक्षा को मजबूत करेगी। श्री शिवकुमार ने कहा कि वह कावेरी बेसिन से आते हैं और किसान के बेटे हैं। कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए उनकी सरकार की प्रतिबद्धता पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पेयजल राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता बना रहेगा और फसल योजना तथा पानी छोड़ने पर सभी निर्णय बारिश, जलाशय में भंडारण, विशेषज्ञों की सलाह और कानूनी राय पर निर्भर करेंगे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में इस सीजन में सामान्य की तुलना में केवल 35 प्रतिशत बारिश हुई है और सूखा जैसी स्थिति बनी हुई है, हालांकि हाल की बारिश से काबिनी और कृष्ण राज सागर जलाशयों में आवक में सुधार हुआ है।
श्री शिवकुमार के अनुसार, कर्नाटक ने इस वर्ष जून में पिछले वर्ष के इसी महीने के 19.9 टीएमसी की तुलना में केवल 2.3 टीएमसी पानी छोड़ा, जबकि जुलाई में एक वर्ष पहले के लगभग 31 टीएमसी की तुलना में केवल 3.6 टीएमसी पानी छोड़ा गया।
उन्होंने कहा, "जुलाई तक लगभग 40 टीएमसी के अपेक्षित पानी छोड़ने के मुकाबले, भारी कमी के कारण हम केवल 3.6 टीएमसी पानी ही छोड़ सके।" उन्होंने कहा कि हाल में पानी मुख्य रूप से बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने और निचले इलाकों में पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए छोड़ा गया था।
श्री शिवकुमार ने कहा कि राज्य कानूनी उपायों को अपनाना जारी रखेगा, संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह लेगा और उच्चतम न्यायालय के समक्ष कार्यवाही का उचित उत्तर देगा। उन्होंने केंद्र के सामने कर्नाटक का पक्ष रखने और राज्य के रुख को समर्थन का आश्वासन देने के लिए केंद्रीय मंत्रियों सीआर पाटिल, प्रह्लाद जोशी और वी सोमन्ना, पूर्व मुख्यमंत्रियों बसवराज बोम्मई और जगदीश शेट्टार तथा विभिन्न दलों के सांसदों का धन्यवाद किया।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कावेरी की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर कर्नाटक के अनुरोध पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय अपनी प्रस्तावित बेंगलुरु यात्रा टालने पर सहमत हो गये हैं। सूखे के मुद्दे पर श्री शिवकुमार ने कहा कि मंत्रियों ने फसल की स्थिति का आकलन करने और किसानों से बातचीत करने के लिए जिलेवार मैदानी दौरे शुरू कर दिये हैं, जबकि राजस्व विभाग राज्य के सूखा घोषित करने का निर्णय लेने से पहले केन्द्र सरकार के मानदंडों के तहत स्थिति का मूल्यांकन करेगा।
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