बेंगलुरु , अगस्त 12 -- तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी छोड़े जाने के विरोध में गुरुवार को प्रस्तावित 'कर्नाटक बंद' को लेकर बुधवार को असमंजस की स्थिति बनी रही। विभिन्न कन्नड़ समर्थक संगठनों के बीच बंद को लेकर सहमति नहीं बन सकी है।

बंद समर्थक तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने का विरोध कर रहे हैं और साथ ही मेकेदाटू, महादायी और कलासा-बंदूरी जैसी दीर्घकालिक सिंचाई परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन का तात्कालिक कारण कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण का वह निर्देश है, जिसमें कर्नाटक को 12 अगस्त से 15 दिनों के लिए तमिलनाडु को प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के लिए कहा गया है। इस निर्देश से किसानों और कन्नड़ संगठनों में आक्रोश बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि तमिलनाडु को पानी देने से पहले कर्नाटक को अपनी पेयजल और कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करना चाहिए।

बंद के समर्थक और प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता वाटल नागराज ने कहा है कि विभिन्न संगठनों के बीच मतभेदों के बावजूद 13 अगस्त को बंद का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने इस आंदोलन को मेकेदाटू परियोजना के शीघ्र निर्माण की मांग से भी जोड़ा है।

इस बंद को लेकर मिली-जुला रुख देखने को मिल रहा है। जहां कई संगठन इस बंद का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ अन्य समूहों ने इसके समय और आम नागरिकों पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए हैं। अंतिम रणनीति तय करने के लिए संगठनों की एक बैठक आयोजित किए जाने की संभावना है।

दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कावेरी निर्देश पर कर्नाटक की प्रतिक्रिया पर चर्चा करने और कानूनी व प्रशासनिक रणनीति तैयार करने के लिए मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है।

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