चेन्नई , अगस्त 02 -- कावेरी जल विवाद और मेकेदातु बांध के मुद्दे पर तनाव के बीच तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा जिलों से दिल्ली प्रदर्शन करने जा रहे किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल को महाराष्ट्र के नागपुर में ट्रेन से जबरन उतार दिया गया और उन्हें आगे की यात्रा करने से रोक दिया गया।
तंजौर सहित तमिलनाडु के लगभग 25 किसानों को नागपुर रेलवे स्टेशन पर पुलिस द्वारा ट्रेन से उतरने के लिए मजबूर किया गया और हिरासत में ले लिया गया। ये किसान कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक के रुख और मेकेदातु बांध परियोजना के विरोध में नयी दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन में भाग लेने जा रहे थे। किसानों के विरोध करने के लोकतांत्रिक अधिकार को दबाने की इस कार्रवाई की राजनीतिक स्तर पर तीखी निंदा की जा रही है।
इस बीच, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अंबुमणि रामदास ने किसानों को हिरासत में लिए जाने के लिए महाराष्ट्र सरकार की कड़ी निंदा की और इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने तमिलनाडु सरकार से इस घटना पर अपना कड़ा विरोध व्यक्त करने का आग्रह किया।
श्री रामदास ने एक बयान में कहा, "कावेरी जल विवाद, मेकेदातु बांध मुद्दे और केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए ट्रेन से दिल्ली जा रहे किसानों को महाराष्ट्र के नागपुर में पुलिस ने रोक दिया और जबरन वापस तमिलनाडु भेज दिया। तमिलनाडु के किसानों पर यह अत्याचार अन्यायपूर्ण और निंदनीय है।"पीएमके नेता ने कहा कि कावेरी नदी किसानों की सिंचाई के लिए जीवन रेखा है। मेट्टूर बांध से पानी न छोड़े जाने के कारण डेल्टा जिले सूखे की चपेट में आ गए हैं, जिससे कुरुवई और सांबा फसलों की खेती प्रभावित हुई है। ऐसे में किसानों को इस अन्याय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। महाराष्ट्र पुलिस द्वारा उन्हें रोकना और वापस भेजना मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
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