चेन्नई , अगस्त 01 -- कावेरी नदी में पर्याप्त पानी नहीं होने और फसलों के सूखने के कारण इस साल तीन अगस्त को मनाया जाने वाला 'आदि पेरुक्कू' त्योहार का उत्साह फीका पड़ गया है। तमिलनाडु सरकार ने इसी हालात के मद्देनजर कर्नाटक से कावेरी का अपना हिस्सा पाने के लिए उच्चतम न्यायालय जाने का फैसला किया है।

इस त्योहार के साथ एक किंवदंती जुड़ी हुई है। तमिलनाडु का आदि पेरुक्कू एक ऐसा त्योहार है जो कावेरी नदी में पानी के नए बहाव के समय मनाया जाता है। इस त्योहार में संगम काल से ही नये शादीशुदा जोड़े कावेरी नदी के किनारे बड़ी संख्या में जमा होते रहे हैं, जिसका जीवंत वर्णन महाकाव्य 'सिलप्पथिकारम' में मिलता है। फिल्म निर्माता मणिरत्नम की फिल्म 'पोन्नियिन सेलवन' (जो कल्कि कृष्णमूर्ति की प्रसिद्ध ऐतिहासिक कहानी पर आधारित है) की शुरुआत भी इसी त्योहार से होती है।

वैसे तो यह त्योहार पूरे राज्य में मनाया जाता है लेकिन नदी के किनारे इस त्योहार को मनाने का कुछ अधिक ही महत्व होता है। लेकिन इस बार यह त्योहार वैसा नहीं होगा क्योंकि डेल्टा क्षेत्र भीषण सूखे की चपेट में है और पानी की कमी के कारण इस मौसम में धान की खेती नहीं हो पाई है। फसलें सूख गई हैं और चारों तरफ उदासी का माहौल है। इस नदी का नाम 'कावेरी' इसलिए पड़ा क्योंकि इसने अपने रास्ते में घने जंगलों और बागों का विशाल विस्तार बनाया है। राज्य की जीवनरेखा मानी जाने वाली इस नदी का गुणगान दो हजार से अधिक वर्षों से कविताओं में किया जाता रहा है।

हर साल जब तमिल महीने 'आदि' में यह त्योहार मनाया जाता था, तो न केवल कावेरी नदी बल्कि उसका तल भी पानी से भर जाता था और महिलाएं अच्छी फसल के लिए भगवान से विशेष प्रार्थना करने के लिए नदी के किनारे इकट्ठा होती थीं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, कर्नाटक द्वारा पानी न छोड़े जाने के कारण सिंचाई के लिए मेट्टूर बांध के दरवाजे तय तारीख 12 जून को नहीं खोले जा सके क्योंकि नदी सूख गई थी।

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