कोलकाता , जून 28 -- पश्चिम बंगाल में कालीघाट तृणमूल की ओर से सांसद डोला सेन ने श्री ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व वाले खेमे पर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न का गैर-कानूनी इस्तेमाल कर कार्यकर्ताओं को गुमराह करने की शिकायत कालीघाट और न्यू टाउन थाने में दर्ज करायी है।

इसमें श्री ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के अलावा श्रीअरूप रॉय, श्री जावेद खान, श्री संदीपन साहा और श्री बिप्लब मित्रा जैसे बड़े नेताओं को भी नामजद किया गया है।

इन आरोपों पर पलटवार करते हुए श्री ऋतब्रत ने कहा, "शिकायत तो कोई भी दर्ज करा सकता है। देश में कानून है और चुनाव आयोग भी है। लोगों को कानून और चुनाव आयोग पर भरोसा रखना चाहिए।"कालीघाट तृणमूल ने यह कदम तब उठाया है, जब ऋतब्रत गुट ने 22 जून को न्यू टाउन के एक आलीशान होटल में तृणमूल का 'विशेष सत्र' बुलाया था। इस बैठक में पार्टी के कई विधायक और पूर्व विधायक शामिल हुए थे। इसमें इस बागी गुट ने राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन कर लिया। इस कमेटी में हालांकि पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को शामिल नहीं किया गया है।

सुश्री बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को शक है कि इस बागी गुट की गतिविधियों के पीछे कुछ और लोग काम कर रहे हैं। न्यू टाउन थाने के थाना प्रभारी (ओसी) को भेजे पत्र में पार्टी ने जांच की मांग की है, ताकि इस साजिश में शामिल लोगों का पता लगाया जा सके।

ममता बनर्जी गुट ने ऋतब्रत गुट के नेताओं के पदों की वैधता पर भी सवाल उठाये हैं। विधानसभा अध्यक्ष रथिन बसु को श्री ऋतब्रत के भेजे गये एक पत्र का हवाला देते हुए कालीघाट तृणमूल ने कहा कि श्री ऋतब्रत ने खुद को पार्टी 'महासचिव' बताया है, जबकि पार्टी का दावा है कि उन्हें आधिकारिक तौर पर कभी यह पद दिया ही नहीं गया।

कालीघाट थाने में दर्ज एक अन्य शिकायत में सुश्री सेन ने आरोप लगाया कि जावेद खान और संदीपन साहा ने खुद को पार्टी का महासचिव बताते हुए शनिवार को कोलकाता में तृणमूल के सभी पार्षदों की बैठक बुलायी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बागी गुट कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भ्रम पैदा करने के लिए अवैध रूप से एक समानांतर संगठन चलाने की कोशिश कर रहा है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ऋतब्रत गुट की हरकतें पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं और वे अवैध रूप से पार्टी के नाम और निशान का इस्तेमाल कर रहे हैं।

शिकायत में पुलिस से यह जांच करने की भी मांग की गयी है कि यह बागी गुट पार्टी के नाम पर नोटिस कैसे जारी कर रहा है, छपाई के सामान के लिए पैसा कौन दे रहा है और बागी गुट के संदेशों को फैलाने के लिए किन सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। सांसद सेन ने पुलिस से इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने का अनुरोध किया है।

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